कहानी : हमला

Aadarsh pandey

मोहल्ले की औरतें सिंह साहब के घर पर एक छोटी सी पार्टी में बतिया रही थी और सभी औरतों की बातचीत का मरकज़ था अपने अपने परिवार की सम्पन्नता का बखान करना और यूँ सामने वाले की नज़र में अपना रुतबा बुलंद करना।

  • मिसेज शर्मा कह रही थी कि मैं तो इस जून की छुटियों में शिमला घूमने गयी थी,वहां लगभग पूरा हिमाचल ही घूम लिया हमने,पचास हज़ार तो सिर्फ टैक्सी वाले ने ही ले लिए और होटल का खर्चा अलग,बस ऐसे समझ लो कि बीस दिन में दो लाख रूपये उड़ा दिए हमने,और मिसेज शर्मा की गर्दन घमण्ड से ऊपर उठ गयी।बाक़ी लोग उन्हें गौर से देखने लगे कि वाकई शर्मा जी बड़े आदमी हैं वो खर्च कर भी सकते हैं।
  • तभी मिसेज कोचर अपने महंगे आई फोन से निगाह उठा के बोली अरे,अब शिमला में क्या रखा है,हम लोग तो कश्मीर गए थे इस बार,मज़ा आ गया,श्रीनगर,गुलमर्ग,जम्मू की वादियां और महंगे शिकारों के बीच पूरे पच्चीस दिन गुजारे हम लोगों ने,लगभग चार पांच लाख रूपये खर्च कर डाले कोचर साहब ने लेकिन फाइव स्टार से कम वाला होटल नहीं लिया हमने कभी।और इतना कहके मिसेज कोचर के चेहरे पर ऐसा गुरुर दिखाई दिया कि वहां उपस्थित सभी लोगों को इसका कोई जवाब नहीं मिल रहा था।
  • तभी जींस और टॉप पहने एक मोटी सी अधेड़ महिला बोली अरे तुम लोग कब तक इंडिया में ही घूमते रहोगे,मेरे हस्बैंड तो मुझे इस बार यूरोप टूर पर ले गए थे,कसम से बेल्जियम का वैभव,स्विट्ज़रलैंड का सौंदर्य देखकर आँखे चौंधिया गयी,लाखो डॉलर खर्च कर दिए हम लोगो ने,ज़न्नत की सैर की हम लोगो ने।पार्टी में मौजूद भीड़ के सामने उस मोटी अधेड़ महिला, जो कि मिसेज चावला थी, का दम्भयुक्त चेहरा सभी की खिल्ली उड़ा रहा था,सब खामोश थे,एकदम खामोश।
  • तभी वहां मिसेज अहलावत आती दिखाई दी,वे लगभग पैंतालीस वर्ष की एक आकर्षक,सौम्य,सरल,सुंदर व् सभ्य महिला थी और एक डिग्री कॉलेज में प्रवक्ता थी,उनके पति सीए थे और दोनों पति पत्नी का मोहल्ले में काफी सम्मान था,उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं थी,दो बच्चे थे जो एक स्कूल में कक्षा आठ व् कक्षा छः में पढ़ते थे।
  • अरे मिसेज अहलावत आप भी बताइये इस बार कहाँ की सैर की जून में,कहाँ घूमने गए आप लोग इस बार।
  • कहीं नहीं,मिसेज अहलावत बोली,दरअसल सास ससुर की तबियत ठीक नहीं रहती है तो हम लोगो ने सोचा कि इस गर्मियों की छुटियों में हम लोग खूब सेवा करेंगे अपने बुजुर्गों की,बच्चों ने भी खूब पैर दबाये अपने दादा दादी के और दोनों बच्चों ने खूब कहानियां सुनी उनसे,अब पूरे वर्ष तो काम का बोझ इतना होता है तो हम लोग उनकी सेवा ज्यादा नहीं कर पाते तो सोचा कि गर्मियों की छुटियों में खूब जम के देखभाल करेंगे और जो उन्हें पसन्द है वही सब करेंगे,इतना अच्छा लगा हम सभी को उन्हें पूरा समय देकर कि जैसे ईश्वर का साथ मिल गया,ईश्वर उन्हें स्वस्थ रखे और उनका आशीर्वाद हम पर ऐसे ही बना रहे।
  • सब लोग चुपचाप मिसेज अहलावत का मुंह देख रहे थे,बिना एक पैसा खर्च किये मिसेज अहलावत के चेहरे पर जो गर्व की आभा दिखाई दे रही थी उसके दायरे की गिरफ्त में क़ैद होकर धरातल के आखिरी कोने में पहुँच गए थे पार्टी में मौजूद सभी भौतिक धनवान।

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