बच्चों के दांत निकलते समय रखें ध्यान

बच्चों के दूधिया दांत 6 माह बाद निकलने आरंभ हो जाते हैं। बच्चा मां का दूध पीता रहता है और जब मां का दूध उसके लिए कम पड़ना आरंभ हो जाता है तो उसे ऊपर का दूध देना पड़ता है। इसके साथ ही दूसरे आहार जैसे खिचड़ी, दलिया, सूजी, दाल का पानी, फलों का रस तथा हलवा आदि भी देना आरंभ किया जाता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है वैसे-वैसे उसे रोटी-सब्जी के साथ ही दूसरे अन्य पदार्थ भी खाने में देना आरंभ कर दिया जाता है। इतना कुछ होने के बाद भी बच्चों को दांत साफ करना नहीं सिखाया जाता।

वैसे माता-पिता को बच्चों को सुबह-शाम दांत साफ करने के लिए मंजन करने की आदत डालनी चाहिए। शहरी क्षेत्रों में तो 15-20 प्रतिशत बच्चों को ही दांत साफ करने की आदत सिखाई जाती है,इसके विपरीत आज भी गांव में बच्चे पांच वर्ष के हो जाने के बाद ही मंजन करना आरंभ करते हैं। इस तरह जब हम बच्चों को दांत साफ करने की आदत नहीं डालते हैं तो उनमें कई रोग तो दांतों के कारण ही हो जाते हैं।

केविटी का खतरा
छोटे बच्चे जब टॉफी, बिस्कुट तथा चॉकलेट जैसे पदार्थ खाते हैं और दांतों को साफ नहीं करते तो उनके दांतों में केविटी होने की ज्यादा उम्मीदें हो जाती हैं। इस पर भी बच्चा जब मीठी वस्तुएं अधिक खाता है तो उसके दांतों में कीड़ा लगने का खतरा और अधिक हो जाता है। कीड़ा लगने के बाद दांतों में केविटी की समस्या हो जाती है। इससे दांतों व दांतों की जड़ों को हानि होने लगती है। दांतों में से मवाद आता है तथा मसूड़ों में सूजन आने लगती है। इससे बच्चे को जबरदस्त दर्द होता है और वह रातों को सो तक नहीं पाता।

दूधिया दांतों का गिरना
केविटी की समस्या के अतिरिक्त बालक जब 6 बर्ष का हो जाता है तो उसके दूधियां दांत गिरना आरंभ हो जाते हैं और स्थायी दांत निकलने आरंभ हो जाते हैं। इस समय ही स्थायी दांतों को निकलने के लिए पर्याप्त स्थान चाहिए होता है। स्थायी दांत लाइन से तथा अपनी जगह पर सही तरीके से निकलें उसके लिए माता-पिता को पूरा ध्यान रखना चाहिए,दांत रोग विशेषज्ञ से भी संपर्क करना चाहिए।

जब हो जाता है इन्फे क्शन 
जब दांतों में इन्फे क्शन हो जाता है तो यह जड़ों तक पहुंचकर,खून की नसों में चला जाता है और फिर बुखार व सूजन आने लगती है। यही इन्फे क्शन गले,फेफड़े तथा पेट तक पुहंचने लगता है। इतना ही कई बार तो यह दिमाग तक भी पहुंच जाता है। इस कारण मिरगी के दौरे या फिर गर्दन तोड़ बुखार भी हो सकता है।

दांतों के खराब निकलने से कभी-कभी बच्चे में हीनता का बोध भी आ जाता है। वह समाज में लोगों के सामने जाते समय हीनता महसूस करता है। दूसरे बच्चे भी उससे दूरी बनाने लगते हैं या फिर उसका मजाक बनाते हैं। दांतों के सही प्रकार से विकास नहीं होने पर उनमें दर्द भी हो सकता है,इस कारण बच्चे सही प्रकार से खाना भी नहीं खाते हैं तथा जो भी खाते हैं वह ठीक प्रकार से चबाते नहीं हैं। इससे उनको पेट की बीमारी भी होने लगती हैं। बच्चों का वजन कम होने लगता है और इससे शारीरिक विकास पर असर आता है।

कैसे बचें इन सबसे
बच्चों को ओरल हाईजिन के विषय में बताएं और इसके कारण होने वाली समस्याओं की जानकारी दें। दोनों समय दांतों को अच्छी तरह से साफ करके उन्हें कुल्ला आदि भी कराएं। हां,वर्ष में एक बार डेन्टिस्ट के पास चेकअप के लिए ले जाएं।

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