धोखेबाज है आपका स्मार्ट फोन, आपकी निजी बातें निजी कंपनियों को बता देता है, जानिए कैसे

Bareilly. यदि कोई कहे कि आप का स्मार्टफोन आपकी जासूसी कर रहा है तो एक बार शायद भरोसा ना हो मगर यह कहीं न कहीं तक सच है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में स्मार्टफोन आप की बातों को सुनकर विभिन्न कंपनियों तक पहुंचा रहा है। बरेली के तमाम लोगों ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर अपने अनुभव भी साझा किए हैं।


कई बार आप किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में चर्चा करते हैं जिससे वर्षों से आपका कोई नाता नहीं रहा हो। कुछ ही दिन में आपकी फेसबुक फ्रेंड सजेशन लिस्ट में उसका नाम दिखने लगता है। ठीक ऐसे ही किसी उत्पाद या घटना की बात करने पर आपने महसूस किया होगा कि यूट्यूब और फेसबुक आदि पर उससे संबंधित वीडियो व पेज नजर आने लगते हैं। यह कोई संयोग नहीं है बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से स्मार्टफोन की जासूसी है। स्मार्टफोन में लगा माइक्रोफोन 24 घण्टे आप की बातों को सुनकर सर्वर पर संरक्षित करता है और उसे इंटरनेट प्रदाता कंपनियां विभिन्न कंपनियों को डाटा के रूप में बेच देती हैं। इसके आधार पर ही आपके पास विज्ञापनों और वीडियो की लाइन लग जाती है।

चौंकिये मत, नया बिजनेस मॉड्यूल है यह
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन साइबर क्राइम एंड साइबर लॉ के चेयरमैन अनुज अग्रवाल कहते हैं कि इसमें चौंकने वाली कोई बात नहीं है। यह बात अब साफ है कि इंटरनेट की दुनिया में कुछ भी छुपा हुआ नहीं है। दरअसल यह नामी कंपनियों की नए बिजनेस मॉड्यूल का हिस्सा है। जो कुछ आपको लगता है कि आप फ्री में पा रहे हैं उसके लिए कंपनियों ने मोटा निवेश किया है। अब इस बिजनेस मॉडल के जरिए उसको वसूला जा रहा है। वॉइस टू टेक्स्ट और विभिन्न एप्लीकेशन इसके टूल हैं।


खुद ही देते अपनी बात सुनने की इजाजत
इंजीनियर जावेद हैदर बताते हैं कि एप का इस्तेमाल करने के लिए उनकी कई सारी शर्तें माननी होती हैं। ये एप सामान्य तौर पर फोटो गैलरी, कॉन्टेक्ट्स, एसएमएस आदि का एक्सेस मांगते हैं। कई ऐप्प आपसे माइक्रोफोन की परमिशन भी मांगते हैं। मतलब जो भी आप बातचीत कर रहे हैं, इसकी जानकारी उनके पास होती है। और यह इजाजत उनको खुद हमने ही दी होती है। कई नामी कंपनियों के एप्लीकेशन तो ऐसे हैं जो आपके एसएमएस पढ़ने तक की परमिशन लेते हैं।

गूगल भी कर चुका स्वीकार
कंप्यूटर एक्सपर्ट डॉ एसएस बेदी कहते हैं कि इंटरनेशनल मीडिया में आई रिपोर्ट के अनुसार गूगल ने माना है कि ओके गूगल इस्तेमाल करने पर डेटा रिकार्ड किया जाता है। वेबसाइट, ऐप्स, लोकेशन से संबंधित डेटा का प्रयोग विज्ञापन दिखाने के लिए किया जाता है। एक और नामी कम्पनी ने भी पिछले दिनों माना था कि यदि उपभोक्ता खुद वॉयस रिकग्निशन के लिए हामी भरे तो ये डेटा थर्ड पार्टी तक, सर्वर के जरिये पहुंच सकता है।


एंड्रॉएड फोन से जासूसी ज्यादा आसान
मोबाइल एक्सपर्ट मो आमिर बताते हैं कि सबसे ज्यादा यूजर एंड्रॉएड के हैं। एंड्रॉएड फोन में एप डाउनलोड करते समय ही सभी बातों की इजाजत देनी होती है। उस वक्त लोग बस जल्दी से ओके ही कर देते हैं। बिना ओके अधिकतर एप तो डाउनलोड भी नहीं होते हैं। आईओएस में ऐसा नहीं है। उसमें जब भी कोई ऐप माइक्रोफोन इस्तेमाल करना चाहेगा तो उसको इजाजत लेनी होगी।
आईफोन की सेटिंग्स में जा कर प्राइवेसी के माध्यम से माइक्रोफोन को ऑफ किया जा सकता है।एंड्रॉएड में हर एप को दी अनुमति बदलने पर यह ऑफ होगा। इसीलिए एप डाउनलोड के वक्त उसकी शर्तों को पूरा पढ़ना जरूरी है।

बीमारी की बात करते ही आया विज्ञापन
फिल्म अंग्रेजी में कहते हैं के निर्माता बंटी खान ने बताया कि वह पिछले दिनों अपने परिवार में बैठकर एक बीमारी की चर्चा कर रहे थे। इसके बारे में उन्होंने आज तक किसी और से चर्चा नहीं की। वह हैरान रह गए जब 2 दिन बाद उनके फेसबुक पेज पर इस बीमारी के इलाज से जुड़ा हुआ स्पॉन्सर्ड पेज आ गया।

ज्योतिष से जुड़ा स्पॉन्सर्ड पेज आया
राजेंद्रनगर के मोहित ने पिछले दिनों दिल्ली जाते समय अपने सहयात्री के साथ ज्योतिष सीखने के संबंध में कुछ बात की। इससे पहले ज्योतिष से उनका कोई विशेष नाता भी नहीं रहा है। दिल्ली से वापस आने के 3-4 दिन बाद ही उनके फेसबुक पेज पर ज्योतिष सिखाने संबंधी स्पॉन्सर्ड पेज नजर आए। इससे पहले उन्हें कभी भी यह पेज नहीं दिखे थे।

आखिर क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिये कंप्यूटर सिस्टम को एक मानव मस्तिष्क के रूप में तैयार किया जाता है। इनमें आवाज को पहचानना और अलग अलग भाषाओं में अनुवाद करना भी शामिल है। अब तो विजूअल परसेप्शन और निर्णय लेने के गुण तक विकसित किये जा चुके हैं।

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