एक ऐसा स्कूल, जहां बच्चे चलाते हैं बैंक

बरेली: भोजीपुरा ब्लाक के प्राथमिक स्कूल पिपरिया के शिक्षकों ने स्कूल बैंक खोलकर अनोखा प्रयोग किया है। यह बैंक जरूरत के वक्त छात्रों की मदद करता है। इस के बहाने छात्रों को सहकारिता और बैंकिंग का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है।


रुहेलखंड विश्वविद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट रहे सौरभ शुक्ला ने 3 वर्ष पहले सहायक अध्यापक के रूप में पिपरिया स्कूल जॉइन किया था। स्कूल में आए दिन बच्चों को छोटी छोटी चीजों के लिए परेशान देख सौरभ के दिमाग में स्कूल बैंक का विचार आया। इस विचार को प्रधानाध्यापिका गायत्री यादव ने भी अपना समर्थन दिया। सौरभ बताते हैं कि स्कूल बैंक में गरीब बच्चों के इस्तेमाल में आने वाली पेंसिल, रबड़, कटर , कॉपियां, टेप, फेविकोल आदि सामान रहता है। इसके लिए प्रारंभिक सहयोग राशि शिक्षकों की तरफ से दी गई। सहकारिता का पाठ पढ़ाने के लिए छात्रों से भी यह कहा गया कि वह अपनी सुविधा अनुसार दो-दो रुपये स्कूल बैंक को दान दें। इस सब से जो पैसा इकट्ठा हुआ, उससे स्कूल बैंक का सामान खरीदा गया। अब स्कूल में ऐसे कई बैंक बॉक्स बने हुए हैं।


खुद छात्र ही करते हैं संचालित
सौरभ बताते हैं कि सहकारी बैंक छात्रों ने मिलकर शुरू किया है। अब वो ही इसका संचालन कर रहे हैं। स्कूल बैंक के लिए मैनेजर  का चयन कक्षावार प्रत्येक कक्षा के नियमित छात्रों में से किया जाता है। स्कूल बैंक से छात्रों को दी गई वस्तुओं का विवरण मैनेजर रजिस्टर में दर्ज करते हैं। प्रत्येक माह के अंत में कक्षाध्यापक रजिस्टर से स्टॉक का  मिलान करते हैं।

ऐसे बैंकिंग सीख रहे छात्र

0 छात्रों को किसी वस्तु की अनुपलब्धता होने पर वह वस्तु बैंक से जीरो फीसदी ब्याज पर एक दिन के ऋण के रूप में दी जाती है।

0 छुट्टी हो जाने पर विद्यालय बन्द होने से पहले छात्रों को उस वस्तु को बैंक में जमा कराना होता है।

0 वस्तु खो जाने पर 30 दिनों के अंदर अपनी सहूलियत के अनुसार कभी भी उसे बैंक में जमा करा सकते हैं। गरीब बच्चों के लिए ऋण में छूट का प्रावधान है।

0 किसी भी छात्र को लगातार दो दिन ऋण नहीं दिया जाता है।

0 एक छात्र के लिए ऋण लेने की सीमा एक सप्ताह में अधिकतम 2 बार तथा एक माह में अधिकतम 7 बार है।

सफल हो रहा है प्रयोग
पिपरिया स्कूल से शुरू हुए इस प्रयोग को अब दूसरे जिले के कई स्कूल भी शुरू कर चुके हैं। सौरभ कहते हैं कि स्कूल बैंक से विद्यालय में छात्रों की सहभागिता और उपस्थिति बढ़ी है। छात्रों में अनुशासन, जिम्मेदारी, स्वावलम्बन आदि मानवीय मूल्यों का भी विकास हो रहा है।

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