विकास पुरुष एनडी तिवारी का 93 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन

New Delhi. वरिष्ठ नेता नारायण दत्‍त तिवारी का 93 वर्ष की उम्र में गुरुवार शाम निधन हो गया. दिल्‍ली के साकेत स्थित मैक्‍स अस्‍पताल में उन्‍होंने आखिरी सांस ली. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. पिछले एक साल से उनकी तबीयत काफी नाजुक थी और पिछले कुछ महीनों से तो तिवारी अस्‍पताल में ही भर्ती थे. उन्‍हें 26 अक्‍टूबर को आईसीयू में शिफ्ट किया गया था. वह बुखार और निमोनिया से जूझ रहे थे. डॉक्‍टर ने बताया कि उन्‍होंने गुरुवार शाम 2.50 बजे अंतिम सांस ली.

तिवारी तीन बार उत्‍तर प्रदेश और एक बार उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री रहे. इसके अलावा उन्‍होंने राज्‍यपाल का पद भी संभाला. वे केंद्र में राजीव गांधी कैबिनेट में वित्‍त व विदेश मंत्री भी रहे. वह पहली बार 1976 में पहली बार सीएम बने थे. संयोग से आज उनका जन्‍मदिन भी था. उनकी गिनती कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में होती थी. उनके परिवार में उनकी पत्‍नी उज्‍जवला शर्मा और बेटा रोहित शेखर है.

वे अभी तक उत्‍तराखंड के इकलौते मुख्‍यमंत्री थे जिन्‍होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था. कांग्रेस में शामिल होने से पहले उन्‍होंने आजादी की लड़ाई में भी हिस्‍सा लिया था. 1990 में वह पीएम पद के भी उम्मीदवार थे तब एनडी तिवारी महज 800 वोटों से लोकसभा चुनाव हार गए. उसके बाद पीवी नरसिम्हा राव को पीएम बनाया गया.

अपने लंबे चौड़े पॉलिटिकल करियर के बावजूद आज नारायण दत्त तिवारी का नाम उनके और उनके बेटे रोहित शेखर के बीच चली कानूनी लड़ाई के लिए ही लिया जाता है. जब लंबे वक्त तक वो रोहित को अपना बेटा मानने से इनकार करते रहे तो अदालत में लंबी लड़ाई चली. दांव-पेंच दिखाए गए. तब जाकर तिवारी ने रोहित शेखर को अपना बेटा माना.

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