बरेली के इस गांव में हैं मध्य प्रदेश के नए सीएम कमलनाथ का घर, जश्न का माहौल

Newsjunction24/bareilly

बरेली जिले के विशारतगंज के छोटे से गांव अतरछेड़ी का कमलनाथ मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनेगा। उनके पिता डा. महेंद्रनाथ इसी गांव में रहते थे। करीब 60 साल पहले वह कारोबार के सिलसिले में कलकत्ता गए और वहीं बस गए। उसके बाद उन्होंने कानपुर में ही अपना कारोबार फैला लिया और वहीं आकर बस गये। बावजूद अतरछेड़ी के लोगों से उनका जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ। वे अक्सर गांव आते रहते थे। उनकी मां लीलावती को यादकर आज भी सुबकने लगीं 95 वर्षीय शांति देवी। गांव वालों से उन्होंने पुराने यादें ताजा कीं।

अतरछेड़ी गांव के अधिवक्ता कुलदीप सिंह ने बताया कि कमलनाथ के बाबा केदारनाथ ने अतरक्षेणी बड़ी हवेली बनाई थी। उनके पिता डा. महेंद्रनाथ तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त उनके ताऊ डा. धर्मेंद्रनाथ इलाहाबाद बोर्ड के चेयरमैन थे, जो वहीं बस गए। छोटे ताऊ डा. सत्येंद्रनाथ ने दिल्ली में स्पेयर पार्ट्स का कारोबारा जमा लिया तो वहीं के हो गए।

डा. महेंद्रनाथ मेरठ कालेज में उनके ससुर कुंवर देवेंद्र सिंह के साथ पढ़ते थे। गांव में उनके मकान भी पास-पास थे। उनमें इतनी गहरी दोस्ती थी कि वे एक-दूसरे के घर में दिनभर साथ रहते थे। कमलनाथ की मां लीलानाथ से उनकी चचिया सास शांति देवी की पक्की दोस्ती थी। वे घरेलू कामकाज भी साथ मिलकर करती थीं।

95 वर्षीय शांति देवी ने आज गांव वालों से लीलानाथ का बेटा कमलनाथ मुख्यमंत्री बनने वाला है तो वह पुरानी यादें ताजा करते हुए सुबकने लगीं। बताती हैं कि डा. महेंद्रनाथ को ज्वार की रोटियां अच्छी लगती थीं।वह अक्सर उनको ज्वार की रोटियां बनाकर खिलाती थीं।

दोस्त को बनाया था फैक्ट्री का एमडी

डा. महेंद्रनाथ करीब 60 साल पहले कलकत्ता चले गए। वहां उन्होंने ईएमसी फैक्ट्री की स्थापना की। अपने परम मित्र कुंवर देवेंद्र सिंह को उन्होंने कंपनी का एमडी बनाकर साथ रखा। इस दौरान वे जब भी पैतृक गांव लौटते तो दोस्त को भी साथ लाते थे।

दबंगों से परेशान होकर छोड़ गए थे जायदाद

मीरगंज के पूर्व ब्लाक प्रमुख ठाकुर अतिराज सिंह से भी डा. महेंद्रनाथ के करीबी रिश्ते रहे हैं। उनकी फैक्ट्री में उन्होंने भी काम किया है। उस दौरान कमलनाथ 11 साल के थे और उनको तालाब से मछली पकडऩे का शौक था। वह अपनी पिता की तीसरी पत्नी के पुत्र हैं। उन्होंने बताया कि अतरछेड़ी गांव के सरकारी स्कूल में डा. महेंद्रनाथ टीचर थे। गांव के कुछ दबंग स्कूल में बेवजह खुराफात करते थे। इससे परेशान होकर डा. महेंद्रनाथ ने अपनी जायदाद भी गांव में ही छोड़ दी और कलकत्ता चले गए। जाने से पहले वह अपनी हवेली में स्कूल खुलवा गए थे।

संजय गांधी के साथ पढ़ते थे देहरादून में

डा. महेंद्र नाथ की शुरुआती शिक्षा देहरादून के शालेय शिक्षा निकेतन में हुई। वहां पर संजय गांधी भी उनके साथ पढ़ते थे। पूर्व ब्लाक प्रमुख ने बताया कि संजय गांधी से दोस्ती की वजह से ही पूरे गांधी परिवार से कमलनाथ का करीबी रिश्ता था। ऐसे में पिता का कारोबार संभालने के साथ ही वह राजनीति के अखाड़े में उतर पड़े। 1979 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा और पहली बार सांसद बने। इसके बाद वह नौ बार लगातार सांसद चुने गए। कांग्रेस सरकार में केंद्रीय कपड़ा मंत्री समेत कई बार मंत्री रहे।

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