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फास्ट फूड खाकर मैदान में पस्त हो रही नई पीढ़ी


बरेली। स्कूलों में रोजाना दो-चार बच्चे प्रार्थना सभा के दौरान गर्मी के चलते बेहोश हो जा रहे हैं। जबकि अब गर्मी का असर भी कुछ कम हो चुका है। स्कूल भी बच्चों की घटती शारीरिक क्षमता से चिंतित हैं। जीआरएम जैसे नामी स्कूल ने अभिभावकों से बच्चों को पौष्टिक भोजन खिलाने और हल्का-फुल्का शारीरिक श्रम कराने की अपील की है।


इस बार जुलाई में स्कूल खुलने के बाद से बच्चों के बेहोश होने का सिलसिला जारी है। स्कूलों ने अपनी असेंबली का समय भी कुछ कम कर दिया है। उसके बाद भी दो-चार छात्र जरा सी धूप लगते ही मैदान में गिर जा रहे हैं। अधिकांश निजी स्कूलों में जेनसेट लगे हुए हैं। लगातार पंखे चलते रहते हैं। उसके बाद भी यदि दो-चार मिनट को पंखे बंद हो जाएं तो बच्चों की हालत खराब होने लगती है। लगभग सभी स्कूलों में ऐसे दृश्य देखने को मिल रहे हैं। छोटी कक्षाएं तो छोड़िए नौंवी से 12वीं कक्षाओं तक के छात्रों का भी स्टेमिना काफी कम है। यह छात्र जरा देर पैदल चलने में ही हांफने लगते हैं। स्कूलों ने इसका कारण खानपान में कमी भी माना है। जीआरएम ने पौष्टिक खानपान के लिए अभिभावकों को प्रेरित करना शुरू कर दिया है। स्कूल में लगातार टिफिन की चेकिंग की जा रही है। जो बच्चे फास्ट फूड लेकर आ रहे हैं। उनके अभिभावकों को ऐसा नहीं करने के लिए कहा जा रहा है।

अभिभावकों को बदलनी होंगी आदतें
जीआरएम स्कूल के प्रबंधक राजेश अग्रवाल जौली ने कहते हैं कि नई पीढ़ी शारीरिक रुप से कुछ कमजोर लग रही है। मुझे लगता है कि कुछ अभिभावक भी सही से ध्यान नहीं दे रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों की आदतों को बदलना होगा। बच्चों को गर्मी के हिसाब से पानी और संतुलित आहार देना चाहिए। टिफिन में फास्ट फूड भेजना तो बंद ही कर दें।

अधूरी नींद और खाली पेट है कारण
बाल रोग विशेषज्ञ डा अतुल अग्रवाल कहते हैं कि बच्चे देर से सोते हैं। सुबह स्कूल जाने से कुछ वक्त पहले ही उठते हैं। जल्दबाजी में बिना कुछ खाए ही स्कूल चले जाते हैं। पहले से ही वो पूरी रात के भूखे होते हैं। जरा भी विपरीत परिस्थितियों को वो सहना नहीं जानते हैं। इसी लिए धूप या उसम में वो बेहोश होकर गिर जा रहे हैं। सीधी सी बात है कि हमने उन्हें धूप या कहें तो कठिनाई के लिए तैयार ही नहीं किया है।

विपरीत परिस्थितियों के लिए करें तैयार
काउंसलर स्वप्निल शर्मा ने कहा कि बच्चों का इतना कमजोर होना सच में चिंता का विषय है। माता-पिता ने बच्चों को कुछ ज्यादा ही कोमल बना दिया है। हमें बच्चों को विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करना होगा। अगर छोटी-छोटी चीजों से बच्चे ऐसे परेशान हो जाएंगे तो भविष्य की मुश्किलों का कैसे सामना करेंगे।

खानपान की आदतों में करें सुधार
खुशलोक अस्पताल में डायटीशियन डा दीक्षा ने कहा कि बच्चों की खानपान की आदतों में सुधार करना होगा। माताओं को फास्ट फूड-जंक फूड की जगह पौष्टिक आहार देना होगा। बच्चे अगर सब्जी-दाल आदि नहीं खाते हैं तो उसमें आंशिक बदलाव कर कुछ नया रुप देकर खिलाया जाए। रोजाना एक गिलास दूध जरुर पिलाएं। गर्मी में पेय पदार्थों का ध्यान रखें।

इन बातों का रखें ध्यान
-बच्चों की नींद जरुर पूरी हो।
-सुबह उठने के बाद शौच जाने की आदत डालें।
-नूडल्स, बर्गर जैसे नाश्ते को अलविदा कह दें।
-पौष्टिक नाश्ता खिलाकर बच्चे को स्कूल भेजे।
-गर्मी हो या सर्दी पानी का ध्यान रखें।
-बच्चे को आउटडोर खेलने की आदत डालें।
(जैसा कि बाल रोग विशेषज्ञ डा अतुल अग्रवाल ने बताया)

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