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Wednesday, October 20, 2021

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कैबिनेट मंत्री से विवाद में चली गई अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की कुर्सी, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य भी बदले

हल्द्वानी। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से विवाद के चलते अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राम गोपाल नौटियाल की कुर्सी छिन गई है। शासन ने उन्हें प्राचार्य पद से मुक्त कर उनकी जगह हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीपी भैसोड़ा को यह जिम्मेदारी दे दी है। अब प्राे. सीपी भैसाड़ा अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य होंगे। वहीं उनकी जगह हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का जिम्मा प्रो. अरुण जोशी को दे दिया गया है। प्राे. जोशी अभी एसटीएच के चिकित्सा अधीक्षक का पद संभाल रहे थे। गुरुवार से वह मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का जिम्मा संभालेंगे। चिकित्सा शिक्षा सचिव डा. पंकज कुमार पांडेय की ओर से इस फेरबदल के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

छोटी सी बात पर लंबी चली थी मंत्री और प्राचार्य में विवाद

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा के प्राचार्य प्रो. रामगोपाल नौटियाल के बीच विवाद काफी लंबे समय से चल रही थी। मंत्री ने प्राचार्य पर अमर्यादित टिप्पणी करने और सरकार की छवि प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग कर दी थी। इसके लिए उन्होंने सचिव स्वास्थ्य को पत्र भी लिखा था, जिसमें प्रो. नौटियाल के कृत्य को उत्तराखंड कर्मचारी आचरण नियमावली के विरुद्ध बताया था। रेखा आर्या ने कहा था कि तीन मई को वर्चुअल बैठक के दौरान प्राचार्य ने मनमाना और उदंड व्यवहार किया। प्राचार्य से वेंटिलेटर की जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि यहां के वेंटिलेटर पर मरीज का मरना तय है।

वहीं, इसके बाद 11 जून को विकास भवन में कोरोना की स्थिति पर समीक्षा बैठक चल रही थी। बतौर जिले की प्रभारी मंत्री रेखा आर्या के साथ ही इसमें विधायक, अल्मोड़ा डीएम नितिन सिंह भदौरिया समेत प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। प्राचार्य डा. नौटियाल पावरप्वाइंट के माध्यम से कोविड अस्पताल बेस चिकित्सालय में व्यवस्थाओं, अब तक की तैयारी व तीसरी लहर से निपटने के जरूरी इंतजाम की जानकारी दे रहे थे। इसी बीच डा. नौटियाल ने प्रस्तुतीकरण रोक फोन रिसीव किया और करीब तीन मिनट तक बात की। इसे प्रभारी मंत्री ने प्रोटोकाल के विरुद्ध बताया तो प्राचार्य ने भी इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। इसी के बाद मामला बिगड़ा। प्राचार्य के पास विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान का फोन आया था। इसी कारण उन्होंने प्रजेंटेशन बीच में ही रोक दिया था।

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