Haridwar Kumbh : कोरोना जांच के नाम पर बड़ा गोलमाल, एक ही घर से लिए गए थे 530 लोगों के सैंपल, अब होगी FIR

देहरादून। हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान फर्जी कोविड टेस्टिंग के मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी। शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा है कि उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार जिला प्रशासन को कुंभ के दौरान कोरोना टेस्टिंग में किए गए घोटाले के मामले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं। इस मामले में कोविड टेस्ट कराने के लिए जिम्मेदार मैक्स कॉरपोरेट के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।

कुंभ मेला स्वास्थ्य विभाग ने जिस मैक्स कॉरपोरेट नाम की कंपनी को कोविड टेस्ट का ठेका दिया था, वह फर्जी है और सिर्फ कागजों पर ही चल रही है। जांच में न तो कंपनी का कोई ऑफिस मिला है और न ही ये पता है कि जांच किस लैब में कराई जा रही थी। मेला स्वास्थ्य अधिकारी ने भी इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है। मेला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अर्जुन सिंह सेंगर का कहना है कि निजी लैबों के साथ सीधे एमओयू किया गया था सिर्फ दिल्ली की लाल चंदानी लैब और हिसार की नालवा लैब के साथ थर्ड पार्टी एमओयू हुआ था। हरिद्वार के जिलाधिकारी सी. रविशंकर ने बताया कि जांच में निजी लैब के द्वारा कई स्तरों पर अनियमितता सामने आ रही है।

जांच में सामने आया है कि टेस्ट के रिजल्ट के लिए दूसरे राज्यों का डेटाबेस इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा एक आईडी पर कई बार टेस्ट कर दिए गए हैं साथ ही एक लैब के द्वारा इतने कम समय में भारी संख्या में कोविड टेस्ट किए जाना सवाल खड़े करता है। हरिद्वार में ‘हाउस नंबर 5’ से ही करीब 530 सैंपल लिए गए। क्या एक ही घर में 500 से ज्यादा लोग रह सकते हैं?” उन्होंने कहा कि फोन नंबर भी फर्जी थे और कानपुर, मुंबई, अहमदाबाद और 18 अन्य स्थानों के लोगों ने एक ही फोन नंबर शेयर किए। कुंभ मेला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अर्जुन सिंह ने कहा कि एजेंसी को इन इकट्ठे किए गए सैंपल्स को दो प्राइवेट लैब्स में जमा करना था, जिनकी जांच भी की जा रही है।

क्या है मामला
हरिद्वार में 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक कुंभ उत्सव का आयोजन किया गया था और इस अवधि में 9 एजेंसियों और 22 प्राइवेट लैब्स की तरफ से लगभग चार लाख कोरोना टेस्ट किए गए थे। मुख्य विकास अधिकारी सौरभ गहरवार की अध्यक्षता वाली एक समिति की तरफ से की गई जांच में प्राइवेट एजेंसी की रिपोर्ट में कई अनियमितताएं पाई गईं। जांच में पाया गया है कि इसमें 50 से ज्यादा लोगों को रजिस्टर्ड करने के लिए एक ही फोन नंबर का इस्तेमाल किया गया था और एक एंटीजन टेस्ट किट से 700 सैंपल्स की टेस्टिंग की गई थी।

जांच में सामने आया है कि एजेंसी में रजिस्टर्ड लगभग 200 नमूना संग्राहक छात्र और डेटा एंट्री ऑपरेटर राजस्थान के निवासी निकले, जो कभी हरिद्वार ही नहीं गए थे। सैंपल लेने के लिए एक सैंपल कलेक्टर को शारीरिक रूप से उपस्थित होना पड़ता है। एक अधिकारी ने बताया कि ‘जब हमने एजेंसी के साथ रजिस्टर्ड सैंपल कलेक्टर्स से संपर्क किया, तो हमने पाया कि उनमें से 50 प्रतिशत राजस्थान के निवासी थे, जिनमें से कई छात्र या डेटा एंट्री ऑपरेटर थे।’

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