Big news in up : उत्तर प्रदेश के 217 स्थानों पर योगी सरकार देने जा रही यह बड़ी सुविधा, फ्री में मिलेगा लाभ। पढ़िये आप और आपका शहर है इसमें है अथवा नहीं

 

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश के लोगों के लिए बड़ी सुविधा देने जा रही है। सरकार ने राज्य के 217 स्थानों पर फ्री वाईफाई सुविधा देने का निर्णय लिया है। यह सुविधा सार्वजनिक स्थानों के आस-पास दी जाएगी जहां थाना, कचहरी, बड़े इंस्टिट्यूट अथवा अदालती कार्य होंगे। जिससे लोगों को संचार सेवा में कोई दिक्कत ना हो। योगी सरकार के ऐतिहासिक फैसले से लोगों में एक तरफ खुशी है, वहीं प्रदेश के शहरी विकास विभाग ने जल्द से जल्द इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने की तैयारी कर ली है।

योगी आदित्यनाथ सरकार सोशल मीडिया के युग में उत्तर प्रदेश के लोगों को फ्री वाई फाई सुविधा देने जा रही है। इसके पीछे उनकी मंशा लोगों की ऑनलाइन कार्य में अधिक से अधिक रुचि पैदा करना है तो कार्य मे भी तीव्रता आएगी। सरकार का मानना है कि इसका सर्वाधिक लाभ जरूरतमंदों को मिलेगा। शहरी विकास विभाग ने जल्द से जल्द संबंधित स्थानों की सूची तलब की है। उम्मीद है कि सरकार 15 अगस्त से पहले प्रदेश की जनता को यह बड़ा तोहफा दे देगी।

प्रदेश के 217 स्थानों में 17 नगर निगम और करीब 200 पालिका हैं

योगी सरकार जिन नगर निगमों और नगर पालिकाओं को यह सुविधा देने जा रही है उनमें 17 नगर निगम क्षेत्र और करीब 200 नगर पालिका क्षेत्र के हिस्से शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से अयोध्या, फिरोजाबाद, मथुरा-वृंदावन, बरेली, आगरा, अलीगढ़, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, सुल्तानपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ, झांसी, इलाहाबाद, गाजियाबाद और शाहजहांपुर आदि बड़े शहर शामिल हैं। शहरी विकास विभाग खाका तैयार कर रहा है, इस खाका के मुताबिक यह सुविधा खासकर बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, कचहरी, तहसील, रजिस्ट्रार कार्यालय, अदालती क्षेत्र और ब्लॉक आदि क्षेत्रों में देने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री के इस मुख्य कार्य को अंजाम देने में जुटा शहरी विकास विभाग एजेंसियों से करार को लेकर मंथन कर रहा है। जिसमें अच्छी नेटवर्किंग देना मुख्य मकसद है। स्पीड में कोई दिक्कत न आए इस शर्त पर कंपनियों से बात की जा रही है।

नगर निकाय उठाएंगे खर्च

प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री की मंशा को अमलीजामा पहनाने में जुटी है तो एक तरफ इस पर आने वाले खर्च पर भी कसरत चल रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस पर आने वाला खर्च नगर निकाय उठाएंगे। इसका भी खाका खींचा जा रहा है।

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