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Saturday, October 23, 2021

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Crime news in uttrakhand : फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बना रहा था 12वीं का छात्र, ऐसे कर रहा था खेल। पुलिस ने कर दिया यह खुलासा

 

देहरादून : पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने 12वीं के छात्र को फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। आरोपित छात्र के पास छह फर्जी रिपोर्ट भी मिलीं। आरोपित असली आरटीपीसीआर रिपोर्ट में कूटरचना कर फर्जी रिपोर्ट तैयार करता था।
एसपी सिटी सरिता डोबाल ने बताया, स्पेशल ब्रांच के इंस्पेक्टर मनोज बिष्ट को शिकायत मिली थी कि एक छात्र आहूजा पैथोलाजी लैब की आरटीपीसीआर रिपोर्ट को एडिट कर फर्जी रिपोर्ट बना रहा है। उन्होंने इसकी सूचना एसओजी को दी। एसओजी इंस्पेक्टर ऐश्वर्या पाल ने टीम गठित कर इसकी जांच की। गुरुवार रात टीम ने छात्र को उसके घर से पकड़ लिया। उसके पास से कोविड-19 की छह फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट, एक प्रिंटर, पुलिस की साइबर सेल का एक फर्जी आइ कार्ड, एक आधार कार्ड व मोबाइल बरामद किया गया। पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह 12वीं कक्षा का छात्र है और मोबाइल व लैपटाप की दुकान पर काम करता है। तकनीक की अच्छी जानकारी होने के चलते उसने पैसे कमाने के लिए फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाना शुरू कर दिया। इसके लिए छात्र ने मोबाइल में दो एप डाउनलोड किए थे। वह आहूजा पैथोलाजी लैब की असली आरटीपीसीआर रिपोर्ट को आनलाइन निकालकर उसे एप के माध्यम से एडिट करता था। उसने सबसे पहले अपनी फर्जी आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद दूसरों की जरूरत के हिसाब से फर्जी रिपोर्ट तैयार करने लगा। ग्राहकों से वह एक रिपोर्ट के लिए 150 रुपये लेता था। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे अभिभावकों की सुपुर्दगी में जमानत पर छोड़ दिया है।

साइबर सेल का कार्ड दिखाकर लेता था झांसे में
इंस्पेक्टर ऐश्वर्या पाल ने बताया कि छात्र ने अपना साइबर सेल का पहचान पत्र भी बनाया था। यह पहचान पत्र दिखाकर वह खुद को साइबर सेल में कार्यरत बताता था और आमजन को झांसे में लेता था। शासन की ओर से शादी समारोह में हिस्सा लेने के लिए कोविड-19 की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट दिखाने की शर्त रखी गई है। ऐसे में आरोपित शादी समारोह में जाने वाले व्यक्तियों की तलाश करता था। कई लोग आसानी से फर्जी रिपोर्ट बनवाने के लिए तैयार हो जाते थे। रिपोर्ट में वह केवल नाम बदलता था, बाकी पूरा डाटा पुराना ही रहता था।

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