हाई कोर्ट ने सरकार को फिर लगाई लताड़, कहा- चारधाम यात्रा के लिए फटाफट कैबिनेट बैठक तो रोडवेज कर्मियों की सैलरी के लिए क्यों नहीं

नैनीताल। रोडवेज कर्मचारियों को पांच महीने से वेतन नहीं देने पर पर हाई कोर्ट सरकार को बख्सने के मूड में नहीं दिख रहा है। पिछली दाे सुनवाई के दौरान अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाने के बाद शनिवार को अवकाश के दिन भी सुनवाई कर रही स्पेशल बेंच ने फिर से सरकार को लताड़ा। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में सुनवाई कर रही स्पेशल बेंच ने कहा कि कोरोना संकट के बीच आप आननफानन में कैबिनेट की बैठक बुलाकर चारधाम यात्रा कराने का निर्णय ले सकते हैं तो पांच महीने से वेतन मांग रहे रोडवेज कर्मचारियों को वेतन देने का आदेश क्यों नहीं जारी कर सकते। बेंच ने यह भी कहा कि क्यों न रोडवेज कर्मचारियों की तनख्वाव जारी होने तक राज्य के वित्त व परिवहन सचिव के वेतन पर रोक लगा दी जाए।

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28 को कैबिनेट बैठक कर फैसला लेने का अादेश

इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की स्पेशल बेंच ने मुख्यमंत्री से 28 जून को कैबिनेट बैठक कर रोडवेज कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर निर्णय लेने को कहा है। साथ ही मुख्य सचिव ओम प्रकाश को आदेश दिया है कि कैबिनेट की बैठक के निर्णय को 29 जून को कोर्ट के सामने पेश करें। कोर्ट ने कहा कि चारधाम यात्रा से ज्यादा महत्पूर्ण कर्मचारियों की सैलरी है, मगर सरकार कर्मचारियों के मौलिक व संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है। सरकार ने अपने बचाव में फरवरी से अब तक 68 करोड़ की देनदारी पर कहा कि सरकार ने 23 करोड़ जारी किया है, जिस पर कोर्ट संतुष्ट नहीं दिखी कोर्ट ने इसे ऊंट के मुह में जीरा कहा है।

अफसरों को किया था तलब

राज्य के मुख्य सचिव समेत वित्त सचिव अमित नेगी, परिवहन सचिव रंजीत सिन्हा, एमडी अभिषेक रुहेला अन्य वर्चुअल कोर्ट में पेश हुए। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद व रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने याचिका दाखिल कर कहा है कि अगर वो सैलरी के लिए हड़ताल पर जाते हैं तो सरकार उनपर एस्मा के तहत कार्रवाई करती है। यूपी सरकार से 700 करोड़ परिसम्पत्तियों के बंटवारे का मिलना है और सरकार ने 45 लाख केदारनाथ आपदा समेत अन्य की देनदारी सरकार पर है।

 

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