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चारधाम यात्रा पर आइए, थकान होने पर इस बार मिलेगी यह विशेष सुविधा…

न्यूज जंक्शन 24, देहरादून। चारधाम यात्रा (pilgrims in Chardham) दो दिन बाद अक्षय तृतीया के दिन से शुरू हो रही है। कोरोना के दो साल बाद पूरे उत्साह के साथ पूर्ण रूप से चारधाम यात्रा का संचालन हो रहा है। इस कारण श्रद्धालुओं में भारी उत्साह दिख रहा है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने चारधाम यात्रा पर पहुंचने का अनुमान है। इसे देखते हुए सरकार ने बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में क्षमता के अनुसार प्रतिदिन दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या तय कर दी है।

शासन की आेर से जारी आदेश के मुताबिक, केदारनाथ धाम में 12 हजार, बदरीनाथ में 15 हजार, गंगोत्री में सात हजार, यमुनोत्री धाम में एक दिन में चार हजार श्रद्धालुओं को दर्शन कर सकेंगे। तीन से 31 मई तक चारधाम यात्रा के लिए 2.29 लाख से अधिक यात्री (pilgrims in Chardham) पंजीकरण करा चुके हैं। यह व्यवस्था यात्रा सीजन के पहले 45 दिनों यानी 3 मई से 31 मई के लिए ही बनाई गई है।

रात 10 बजे से सुबह चार बजे तक प्रतिबंधित रहेगा यातायात

चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं (pilgrims in Chardham) की सुरक्षा के लिए यात्रा मार्गों पर रात 10 बजे से सुबह चार बजे तक वाहनों का आवागमन प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा यात्रा पर आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए पर्यटन विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा। यात्रा के दौरान कोविड के अनुरूप व्यवहार का पालन करना होगा।

श्रद्धालुओं को मिलेगी फुट मसाज की सुविधा

चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु (pilgrims in Chardham) इस बार फुट मसाज थैरेपी से थकान दूर कर सकेंगे। पर्यटन विभाग की ओर से उत्तरकाशी व रुद्रप्रयाग जिले में 100 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए फुट मसाज थैरेपी का प्रशिक्षण दिया गया है। जो केदारनाथ और यमुनोत्री धाम की पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को फुट मसाज की सुविधा देंगे।

चारधाम यात्रा में केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पैदल चलना पड़ता है। कई किलोमीटर पैदल यात्रा करने से श्रद्वालु थक जाते हैं। पैरों के लिए आराम की जरूरत होती है। अभी तक केदारनाथ व यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं को फुट मसाज की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मसाज थैरेपी का प्रशिक्षण दिलाने की पहल की थी। जिससे वैष्णों देवी की तर्ज पर श्रद्धालुओं को फुट मसाज थैरेपी की सुविधा मिल सके। हाल ही में उत्तरकाशी जिले के दुर्बिल, नेशनी, पिंटकी मधेश, दांगुड गांव, बाडिया गांव, राणा गांव, कुठार गांव के लोगों को उत्तराखंड आयुर्वेद विश्विद्यालय के सहयोग से फुट मसाज थैरेपी प्रशिक्षण दिया गया।

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