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चंपावत के इस स्कूल में बच्चों ने फिर SC भोजनमाता के हाथों बना खाना खाने से किया मना, स्कूल प्रशासन ने की ये कार्रवाई

न्यूज जंक्शन 24, चंपावत। सूखीढांग के जीआईसी में मध्यान्ह भोजन योजना विवाद फिर शुरू हो गया है। छठीं से आठवीं कक्षा के सात से दस बच्चे अनुसूचित जाति की भोजनमाता के हाथों बनाया खाना नहीं खा रहे हैं (children again refused to eat the food prepared by the SC foodmother)। आरोप है कि सवर्ण जाति के ये बच्चे जातिगत कारणों से भोजन का बहिष्कार कर रहे है।

बताया जा रहा है कि खाना न खाने पर चेतावनी देते हुए स्कूल प्रशासन ने कुछ बच्चों की टीसी भी काट दी है। इस मामले को सुलझाने के लिए प्रधानाचार्य प्रेम सिंह ने गुरुवार को अभिभावकों की बैठक बुलाई लेकिन इसमें कोई नतीजा नहीं निकला। जीआईसी में इस सप्ताह के पहले चार दिनों में सात से दस सवर्ण बच्चों ने भोजन करने से इन्कार कर दिया।

जानकारी मिलने पर प्रधानाचार्य और कुछ शिक्षकों ने बच्चों को समझाने का प्रयास किया लेकिन बच्चों ने घरेलू कारणों की दलील देकर खाना खाने से मना कर दिया। नाम काटने की धमकी देते हुए कुछ बच्चों की टीसी भी काटी गई। स्कूल प्रशासन ने छात्रों को अभिभावकों के आने और भोजन न करने तक स्कूल आने से रोक लगा दी। गुरुवार को हुई बैठक में अभिभावकों ने भोजन न करने की वजह जातिगत न बताते हुए निजी बताई, लेकिन लंबी बैठक के बावजूद मामला अनसुलझा रहा। स्कूल में दो सवर्ण और एक दलित भोजनमाता है।

इस बारे में प्रधानाचार्य प्रेम सिंह ने बताया कि कुछ दिनों से सात से दस बच्चे अनुसूचित जाति की भोजनमाता के हाथ का बना खाना नहीं खा रहे हैं (children again refused to eat the food prepared by the SC foodmother), जबकि दूसरी भोजनमाता के हाथों से बनाया खाना ये बच्चे खाते रहे हैं। यह स्थिति न स्कूल के नियमों के अनुकूल है और न ही सामाजिक सौहार्द्र के हिसाब से ठीक है। इन बच्चों को चेतावनी देने के लिए कुछ बच्चों को टीसी भी दी गई है, मगर नाम नहीं काटा गया है। अभिभावकों के साथ हुई बैठक में भी इसका कोई नतीजा नहीं निकल सका। पूरे मामले की जानकारी विभागीय उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।

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