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लॉकडाउन में फेसबुक लाइव से सज रही शायरों की महफिल, जानिए बरेली से कौन-कौन हो रहा शामिल

बरेली। लॉकडाउन के कारण कवि सम्मेलन और मुशायरे तो बंद हैं। ऐसे में फेसबुक पर ही शायरों की महफिल सज रही है। बरेली के तमाम युवा शायर एफबी लाइव के माध्यम से अपनी शायरी सुना रहे हैं। लाइव मुशायरे के दौरान बरेली ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लोग उन्हें सुनते हैं। इस दौरान लोगों को न तो कोरोना की याद आती है और न ही उन्हें लॉकडाउन में घर पर कैद रहने की चिंता सताती है।

वो खुदा है जो करेगा बहुत अच्छा होगा


देश-दुनिया को अपनी शायरी से चकित करने वाले मध्यम सक्सेना भी इन दिनों फेसबुक के माध्यम से रोजाना लाइव हो रहे हैं। मध्यम की शायरी सुनने के लिए शाम सात बजे फेसबुक पर मजमा लगना शुरू हो जाता है। उनके प्रशंसक लॉकडाउन में उनकी शायरियों का पूरा आनंद उठा रहे हैं। मध्यम ने अपनी कुछ पंक्तियां हिन्दुस्तान के साथ भी साझा की हैं,

हौसला रखिये हौसले से फायदा  होगा।
हद से हद भी बुरा हुआ तो तजुर्बा होगा।।
आप बस खुद को भरोसा ये दिलाते रहिये।
वो खुदा है जो करेगा बहुत अच्छा होगा।।

उनकी यह शायरी भी लोगों को पसंद आई,
घर में हम हैं, फाके हैं , खुद्दारी है।
सबकी अपनी अपनी जिम्मेदारी है।।
अपना क्या है खून, पसीना,चार आने।
उसका क्या है जो कुछ है सरकारी है।।
रस्सी, खेल, तमाशा  सारा उसका है।
तेरा , मेरा ,  सबका  वही  मदारी  है।।
मरने  से  पहले  कैसे  मर  जायें  मैं?
जिंदा रहने की हर कोशिश जारी है।।

असीर-ए-इश्क हूं लेकिन तेरा गुलाम नहीं


बेहद कम समय में अपनी शायरी से दिल जीतने वाले आशू मिश्रा भी इन दिनों फेसबुक पर खूब लाइव हो रहे हैं। रेख्ता में अपनी शायरी से उन्होंने हलचल मचा दी थी। शायरी कहने का उनका शर्मीला अंदाज बड़ा पसंद किया जा रहा। यह शायरी तो लोकप्रियता के नए पैमाने छू रही है,

यहां पे आह-ओ-फुगां दर्द-ओ-गम का नाम नहीं
मेरा कलाम है ये मीर का कलाम नहीं
मैं तेरी बात तो मानूंगा तेरा हुक्म नहीं
असीर-ए-इश्क हूं लेकिन तेरा गुलाम नहीं

लॉकडाउन के दौर में उनका यह शेर खूब पसंद किया जा रहा,
साँसों का शोर जिस्म की परछाई और मैं
कमरे में दो ही लोग हैं तन्हाई और मैं।

सचिन की शायरी भी कर रही कमाल


महानगर निवासी शायर सचिन अग्रवाल भी फेसबुक पर कमाल कर रहे हैं। सचिन रोज ही अपनी वाल पर अपनी शेरों-शायरी पोस्ट कर रहे हैं। इन दिनों गरीबों की मदद के नाम पर फोटो क्लिक करवाने की जो होड़ दिख रही है, उस पर लिखी उनकी पंक्तियों को काफी पसंद किया जा रहा है,

आप बताएं, पाप किया या उसने पुण्य कमाया है
शमशानों में बेंच बनाकर उन पर नाम लिखाया है
एक कहावत पढ़ी थी मैंने नेकी कर दरिया में डाल
अब लगता है मास्टर जी ने मुझको गलत पढ़ाया है
उधर भूख है, लाचारी है, बीमारी है, लाशें भी
इधर सियासत ने सबके संग इक फोटो खिंचवाया है
जिम्मेदारी को एहसान समझने वाले लोग सुनो
ऊपर वाले ने सबको ही खाली हाथ बुलाया है।।

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