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ज्ञानवापी के वजू खाने में ‘शिवलिंग’ या फव्वारा? पढ़ें कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट, हुए कई चौंकाने वाले खुलासे

न्यूज जंक्शन 24, लखनऊ। ज्ञानवापी मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट अधिवक्ता आयोग (Gyanvapi court commissioner report) ने वाराणसी कोर्ट को सौंप दी है। यह सर्वे स्पेशल कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह, दूसरे कमिश्नर अजय मिश्रा और अजय प्रताप सिंह की टीम ने 14, 15 और 16 मई को किया था। 12 पेज की इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वजूखाने में मिली आकृति शिवलिंग जैसी है। शिवलिंग के फव्वारा होने की बात साबित नहीं हो सकी है।

कमीशन की रिपोर्ट (Gyanvapi court commissioner report) में स्पष्ट किया गया है कि मुस्लिम पक्ष, जिसे फव्वारा कह रहा है, उसमें पाइप डालने की कोई जगह नहीं है। मौके पर फव्वारा भी नहीं चलाया जा सका था। न्यायालय में दाखिल कमीशन की कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट को वादी और प्रतिवादी पक्ष को भी उपलब्ध करा दिया गया है।

अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह की रिपोर्ट (Gyanvapi court commissioner report) में बताया गया कि वजू के तालाब का नाप 33×33 फुट निकला है। इसके बीच में सभी किनारों पर 7.5 फुट अंदर एक गोलाकार घेरा आकृति कुए की जगतनुमा पाई गई है। उसका बाहर व्‍यास 7 फुट 10 इंच और अंदर का व्‍यास करीब 5 फुट 10 इंच है। इस गोले घेरे के भीतर लगभग ढाई फुट ऊंची व बेस पर 4 फुट की व्‍यास की गोलाकार पत्थरनुमा आकृति मिली है, जो कि पानी में डूबी थी। इसके शीर्ष पर नौ इंच का गोलाकार सफेद पत्थर अलग से लगा है, जिस पर बीच से पांच दिशाओं में पांच खांचे बने हैं। इस आकृति की सतह पर अलग प्रकार का घोल चढ़ा हुआ प्रतीत हुआ। हालांकि यह थोड़ा-थोड़ा चटका हुआ है। इस पर पानी में डूबे रहने के कारण काई जमी थी। जबकि काई साफ करने पर काले रंग की आकृति निकली। इस दौरान हिंदू पक्ष ने कहा कि यह आकृति शिवलिंग है। उनका दावा है कि अमूमन तौर पर शिवलिंग इसी आकृति के होते हैं। जबकि दूसरे पक्ष ने कहा कि यह फव्‍वारा है।

शिवलिंग और फव्वारे के दावे के बीच विशेष अधिवक्ता आयुक्त ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के मुंशी एजाज मोहम्मद से पूछा कि यह फव्वारा कब से बंद है। उनका पहले जवाब आया कि काफी समय से बंद है। फिर कहा 20 वर्ष और फिर उन्होंने बताया कि 12 वर्ष से बंद है। फव्वारा चालू करके दिखाने पर उन्होंने असमर्थता भी जताई। उस आकृति की गहराई में बीचों-बीच सिर्फ आधे इंच से कम का एक ही छेद मिला, जो 63 सेंटीमीटर गहरा था। इसके अलावा कोई छेद उस जगह पर खोजने के बाद भी नहीं मिला। फव्वारे के लिए पाइप डालने की भी जगह नहीं है।

तहखाने के अदंर मिले ये साक्ष्‍य

इसके अलावा रिपोर्ट में तहखाने के भीतर मिले साक्ष्यों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दरवाजे से सटे लगभग 2 फीट बाद दीवार पर जमीन से लगभग 3 फीट ऊपर पान के पत्ते के आकार की फूल की आकृति बनी थीं, जिसकी संख्या 6 थी। वहीं, तहखाने में चार दरवाजे थे। हालांकि उन्‍हें नई ईंट लगाकर बंद कर दिया गया था। इस तहखाने में 4-4 खम्भे मिले हैं, जो पुराने तरीके के थे, जिसकी ऊंचाई 8-8 फीट थी, जबकि नीचे से ऊपर तक घंटी, कलश, फूल के आकृति पिलर के चारों तरफ बने थे। एक खम्भे पर पुरातन हिंदी भाषा में सात लाइनें खुदी हुईं, जो पढ़ने योग्य नहीं थीं। लगभग 2 फीट की दफती का भगवान का फोटो दरवाजे के बायीं तरफ दीवार के पास जमीन पर पड़ा हुआ था जो मिट्टी से सना हुआ था। इसके साथ रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अन्य तहखाने में पश्चिमी दीवार पर हाथी के सूंड की टूटी हुई कलाकृतियां और दीवार के पत्थरों पर स्वास्तिक, त्रिशूल और पान के चिन्ह और उसकी कलाकृतियां बहुत अधिक भाग में खुदी है। ये सब कलाकृतियां प्राचीन भारतीय मंदिर शैली के रूप में प्रतीत होती है, जो काफी पुरानी है, जिसमें कुछ कलाकृतियां टूट गई हैं।

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