सुखबीर सिंह संधू बने उत्तराखंड के नए मुख्य सचिव, जानिए ओम प्रकाश को क्यों हटाया और कहां भेजा सरकार ने

देहरादून। उत्तराखंड सरकार का नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक के बाद एक कई फैसले लेते जा रहे हैं। रविवार शाम को शपथ लेने के बाद देर शाम उन्होंने कैबिनेट बैठक भी कर डाली, जिसमें बेरोजगारों, अतिथि शिक्षकों और पुलिस कर्मियों के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। अब सोमवार को उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव को ही बदल दिया है।

सुबह से जिस बात की सुगबुगाहट हो रही थी, दोपहर होते-होते उस पर धामी सरकार ने मुहर लगा दी। उत्तराखंड सरकार में मुख्य सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे ओम प्रकाश को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अब उनकी जगह 1988 बैच के वरिष्ठ अाईएएस सुखबीर सिंह संधू को नया मुख्य सचिव बनाया गया है। वह अब तक केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर थे और वहां एनएचएआई के चेयरमैन का पद संभाल रहे थे। सोमवार को सीएम धामी की आेर से भारत सरकार के केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को पत्र भेजा गया और आग्रह किया गया कि आईएएस सुखबीर सिंह संधू को रिलीव कर दिया जाए। यह पत्र मिलते ही केंद्र सरकार ने संधू को रिलीव कर दिया।

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संधू के रिलीविंग लेटर में लिखा है कि उन्हें उनके मूल कैडर उत्तराखंड भेजा जा रहा है। केंद्र से रिलीव होते ही संधू को उत्तराखंड के मुख्य सचिव पद पर तैनाती दे दी गई। यह पद अभी तक 1987 बैच के आईएएस ओम प्रकाश संभाल रहे थे। इन्हें फिलहाल प्रतीक्षारत रखा गया है। चर्चा है कि ओम प्रकाश को राजस्व परिषद का चेयरमैन बनाया जा सकता है। मुख्य सचिव पद से उत्पल कुमार सिंह के रिटायरमेंट के वक्त भी सुखबीर सिंह संधू रेस में शामिल थे, लेकिन उस वक्त 1987 बैच के ओम प्रकाश को तरजीह दी गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निकट होने का फायदा ओम प्रकाश को मिला था।

कौन है संधू, जिन पर सीएम धामी ने जताया भरोसा

सुखबीर सिंह संधू 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। ऊधमसिंह नगर जिले के गठन के बाद सुखबीर सिंह संधू ने यहां के पहले जिलाधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला था। वह पंजाब में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अमृतसर से एमबीबीएस हैं । गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर से उन्होंने हिस्ट्री में मास्टर डिग्री हासिल की है। इसके अतिरिक्त वह लॉ ग्रेजुएट भी है। लुधियाना में एमसी कमिश्नर के रूप में कार्य करते हुए उन्हें प्रेसिडेंट मेडल भी मिल चुका है। छह साल से वह केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर थे और एनएचएआई के चेयरमैन का पद संभाल रहे थे। 2019 में उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण का जिम्मा सौंपा गया था।

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संभाल चुके हैं कई अहम जिम्मेदारी

काम करने में तेजतर्रार माने-जाने वाले संधू के पास व्यापक अनुभव है। संधू केंद्र सरकार और उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश तथा पंजाब सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के वह सचिव भी रह चुके हैं। उत्तराखंड में लौटने के बाद बीसी खंडूड़ी, विजय बहुगुणा और हरीश रावत के प्रमुख सचिव भी रहे हैं। संधू मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत उच्च शिक्षा विभाग में अतिरिक्त सचिव भी रह चुके हैं।

ओम प्रकाश को हटाने का कारण

मुख्य सचिव पद से ओमप्रकाश को हटाए जाने के पीछे उनका तुनक मिजाज रवैया और कहीं न कहीं उनके कार्यकाल में हुए तमाम विवाद और सरकारी कामों में उनका ढीला रवैया भी अहम वजह माना जा रहा है। यही नहीं, मुख्य सचिव रहते ओम प्रकाश पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने मुख्य सलाहकार के रूप में पूर्व आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को भी अप्वॉइंट किया, यह मुख्य सचिव ओमप्रकाश के लिए सबसे बड़ा फेलियर था।

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