जंगल की आग ने फैलाया धुंध, दृश्यता कम होने से हेलीकाॅप्टर नहीं भर पा रहा उड़ान

हल्द्वानी । उत्तराखंड में जंगलों की आग बेकाबू हो चली है। कुमाऊं में नैनीताल, अल्मोड़ा और गढ़वाल में टिहरी व पौड़ी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आग को रोकने के लिए 12 हजार वन कर्मी लगे हुए हैं। 1,300 फायर क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर वन विभाग के सभी अधिकारियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है। इसके बाद भी यह अाग लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसीलिए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने केंद्र सरकार से मदद मांगी, जिसके बाद प्रदेश को दो हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराए गए हैं।

मगर जंगल से उठते धुएं ने वातावरण को घेर लिया है। इससे छायी धुंध के कारण दृश्यता बेहद कम हो चली है, जिसके कारण हेलीकाॅप्टर उड़ान ही नहीं भर सका। उसे देहरादून से पंतनगर और फिर यहां से पानी भरने के लिए भीमताल जाना था, मगर लो विजिविलिटी के कारण यह देहरादून से ही उड़ान भरने में सफल नहीं हुआ। नोडल अफसर व डीएफओ तराई पूर्वी संदीप कुमार ने बताया कि पंतनगर व आसपास के इलाके में धुएं के कारण विजिबिलिटी काफी कम है। जिससे हेलीकॉप्टर लैंड कराने में दिक्कत आएगी। यही वजह है कि सेना का हेलीकॉप्टर अभी अपने देहरादून कैम्प से रवाना नहीं हुआ। वहीं, वायुसेना की टीम मदद के लिए सुबह ही देहरादून पहुंच गई थी।

बताया जा रहा है कि जंगलों में लगी यह आग वर्ष 2016 के बाद लगी भीषण आग है। इससे अब तक करोड़ों की वन संपदा राख हो गई है।

 

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