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Bareilly news-श्मशान घाट पर घड़े के अंदर जमीन में दबी मिली थी बच्ची, नाम रखा गया सीता, अब बन रही फिल्म

बरेली। दो साल पहले शहर में एक ऐसी घटना हुई, जिसने सभी के जहन को झकझोंर कर रख दिया। शहर के सिटी श्मशान भूमि में जहां शवों का अंतिम संस्कार होता है, वहां कुंठित मानसिकता वाले किसी व्यक्ति ने मटके में जिंदा बच्ची को दफन कर दिया था लेकिन ईश्वर ने उस बच्ची को जीवनदान दिया। आसपास के लोगों ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी और पुलिस को सूचना दी। इस पर पुलिस ने बच्ची को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां बच्ची को उचित इलाज मिला और वह स्वस्थ हो गई।

मामला प्रशासन तक पहुंचा तो बच्ची के प्रति संवेदनाओं का लहर आई। एक जनप्रतिनिधि बच्ची की मदद को आगे आए। वहीं, इस बच्ची का नाम ‘सीता’ रखा गया। अब इस अंजान सीता को विदेशों में भी पहचान मिलने जा रही है।

डेनमार्क में होगी फिल्म की लांचिंग

सीता की जिंदगी की कहानी ने मानवीय संवेदनाओं पर गहरी चोट की थी। इसके साथ ही एक बहस भी छिड़ गई कि सभ्य समाज में ऐसे भी लोग हैं जो बेटी नहीं… बेटे की ख्वाहिश रखते हैं। शायद यही वजह थी कि मटके में बच्ची को रखकर मरने के लिए छोड़ दिया गया। यह मामला सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। यहीं से डेनमार्क के स्वतंत्र फिल्म निर्माता एलेक्स बरसेफ सीता की कहानी ने काफी प्रभावित हुए।

शुक्रवार को वह एक महिला सदस्य के साथ सीता की इलाज संबंधी जानकारी लेने जिला महिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने यहां अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. अलका शर्मा से सीता को किस प्रकार की दिक्कत थी, कैसे उसका इलाज किया गया। उसको गंभीर हालत से स्वस्थ होने में कितना समय लगा आदि बिंदुओं पर जानकारी ली। उनका कहना है कि वह जिले में ही सीता की जिंदगी को शूट करेंगे। इसके बाद लखनऊ के एक प्रोडक्शन हाउस के माध्यम से फिल्म को लांच किया जाएगा।

 

क्या बोलीं मुख्य चिकित्सा अधीक्षका

मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि डेनमार्क से दो लोग अस्पताल आए थे। उन्होंने मटके में मिली बच्ची के इलाज संबंधी जानकारी ली है। उनका कहना था कि वह बच्ची की जिंदगी पर एक शार्ट फिल्म बनाएंगे।

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