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Wednesday, October 20, 2021

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हाई कोर्ट के इस आदेश ने फिर बढ़ाई सरकार की परेशानी, रोडवेज कर्मियों के वेतन मामले में जानिए क्या कहा कोर्ट ने

नैनीताल। रोडवेज कर्मचारियों के पांच महीने के बकाए वेतन को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को हाई कोर्ट ने सरकार को 23 करोड़ रुपये तत्काल जारी करने के आदेश दिए हैं। परिवहन निगम को आदेश देते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि रोडवेज कर्मचारी महामारी से नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं है। काम के बदले तनख्वाह उनका मूलभूत अधिकार है और सरकार ये अधिकार उनसे नहीं छीन सकती। इसलिए आगे की तनख्वाह के लिए कोर्ट ने परिवहन निगम के एमडी को रिवाइवल का पूरा प्लान बनाकर परिवहन सचिव को भेजने को कहा। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि यह रिवाइवल प्लान 15 जुलाई तक संभावित कैबिनेट बैठक में चर्चा के लिए रखा जाए। 19 जुलाई को अगली सुनवाई के दौरान मामले की प्रगति रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करनी होगी।

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सचिवों से किए तीखे सवाल, सुनाई खरी-खरी

सुनवाई के दौरान प्रमुख सचिव ओम प्रकाश, परिवहन सचिव रंजीत सिन्हा व एमडी रोडवेज अभिषेक रुहेला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। कोर्ट ने मुख्य सचिव ओम प्रकाश से पूछा कि आपके प्रपोजल पर कैबिनेट ने क्या निर्णय लिया तो मुख्य सचिव ने बताया कि अभी कैबिनेट बैठक 25 जून को हुई थी अौर यह बैठक दो सप्ताह में एक बार होती है। अगली बैठक में प्रकरण को कैबिनेट के सम्मुख पेश किया जाएगा। इसके बाद कोर्ट ने वित्त सचिव अमित नेगी से पूछा कि कर्मचारी को वेतन नहीं दिया गया, ऊपर से पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ गए हैं, निगम के पास बसों को चलाने के लिए धन नहीं है, निगम कैसे चलेगा ? साथ ही परिवहन सचिव रणजीत सिन्हा से कहा कि आधा-अधूरा प्रपोजल ले के आते हो, जबकि मुख्य सचिव, परिवहन सचिव और परिवहन सचिव तीनों वरिष्ठ सचिव हैं, आप मिलकर एक चाय के बहाने इस प्रपोजल को मिलकर क्यों नही बनाते। आप लोग तो जिम्मेदारी एक-दूसरे के सिर पर डाल देते हो। यह समस्या और अधिक बढ़ गई है, क्योंकि पहली जुलाई को वेतन नहीं दिए तो एक माह और बढ़ जाएगा।

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परिसंपत्तियों के बंटवारे पर मांगी सही जानकारी

महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया गया कि इस मामले का नेचर सर्विस से जुड़ा है । यह कर्मचारियों के वेतन का मामला है, इसमें सर्विस की रिट दायर होनी थी।याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका दायर कर दी, इसलिए यह पोषणीय नही है। जिस पर कोर्ट ने कहा कि निगम कर्मचारियों को पांच माह से वेतन नहीं दिया गया, कोर्ट इस मामले का स्वतः संज्ञान भी ले सकती है, यह कोर्ट की पावर है। क्योंकि यहां अधिकारों का हनन हो रहा है। कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा है कि राज्य बनने पर जो संपतियों का बंटवारा हुआ था, वह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, उस केस में क्या हुआ, अगली तारीख को उसकी स्थिति के बारे में बताएं।

रिवाइवल प्लान नए सिरे से बनाएं

रोडवेज कर्मचारियों के अधिवक्ता एमसी पंत ने कोर्ट को बताया कि एमडी ओर से रखे गए प्लान में भविष्य की तनख्वाह, पीएफ, ग्रेच्यूटी व ईएसआई का जिक्र नहीं है। ईएसआई व पीएफ जमा न होने से कर्मचारियों के भविष्य सुरक्षा के साथ ही उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा में भी समस्या आ रही है। इसके अलावा यूपी से परिसंपत्ति बंटवारे से मिलनी वाली राशि को लेकर भी निगम एमडी की ओर से कुछ नहीं बताया गया है। जिस पर कोर्ट ने परिवहन निगम एमडी को नए सिरे से निगम के रिवाइवल प्लान में सभी बिंदुओं को शामिल करने को कहा।

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