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कल लग रहा सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण, जानें क्या होगा इसका प्रभाव

न्यूज जंक्शन 24, नई दिल्ली। कल यानी 19 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन एक बड़ी खगोलीय घटना होने जा रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि 19 नवंबर दिन शुक्रवार को सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण (Longest Lunar Eclipse)लगेगा। इस दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच से गुजरेगी। ग्रहण दोपहर 1:30 मिनट के बाद अपने पीक पर होगा।

इस दौरान पृथ्वी पूरे चंद्रमा को सूरज की किरणों से ढक देगी। खगोलविदों के अनुसार, इस दौरान चांद का रंग सुर्ख लाल होगा, जिसे भारत में भी देखा जा सकेगा। इसके पहले 26 मई को चंद्रग्रहण (Longest Lunar Eclipse) लगा था। चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) के दीदार को लेकर देश की कई नक्षत्रशालाओं में बड़ी तैयारियां की गई हैं।

सदी का लंबा चंद्रग्रहण क्यों?

नासा के वैज्ञानिकों और खगोलविदों का कहना है कि चंद्रग्रहण (Longest Lunar Eclipse) होगा, जो 6 घंटे 28 मिनट और 23 सेकंड का होगा। वहीं, कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार, यह 1000 सालों का सबसे लंबा आंशिक चंद्रग्रहण है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पहले 18 फरवरी वर्ष 1440 को पृथ्वी पर इतना लंबा आंशिक चंद्रग्रहण देखा गया था। यही नहीं अगली बार इस तरह का नजारा देखने के लिए लोगों को 8 फरवरी 2669 का इंतजार करना होगा। नासा के अनुसार पृथ्वी 21वीं सदी में 228 चंद्रग्रहण (Longest Lunar Eclipse) का साक्षी बनेगी। एक माह में दो और तीन चंद्रग्रहण भी देखने को मिल सकते हैं।

असम और अरुणाचल में दिखेगा चांद

वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्रमा उन्हीं स्थानों पर दिखेगा, जहां वो हॉरिजन के ऊपर होगा। भारत के उत्तरपूर्वी राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश के लोग इस खगोलीय घटना को देख सकेंगे। इसी तरह उत्तरी अमेरिका के लोग भी सदी के सबसे लंबे ग्रहण के साक्षी बनेंगे। मेक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी एशिया और उत्तरी यूरोप के लोग भी चंद्रग्रहण को देखेंगे।

धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण का प्रभाव

19 नवंबर 2021 शुक्रवार को साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगेगा, जिसका भारत में कोई प्रभाव नहीं है। यह केवल उपछाया ग्रहण है। आपको यह भी अवगत करा देते हैं कि उपछाया ग्रहण होता क्या है। जब चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश किए बिना ही बाहर निकल आता है उसे उपछाया ग्रहण कहते हैं। चंद्रमा जब धरती की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है, तभी उसे पूर्ण रूप से चंद्रग्रहण माना जाता है। उपछाया ग्रहण को वास्तविक चंद्र ग्रहण नहीं माना गया है। भारत में इसका कोई महत्व नहीं है। इसका कोई सूतक भी भारत में नहीं लगेगा और न किसी प्रकार के धार्मिक कार्यों पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा। केवल गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। जैसे चाकू से कोई सामान न काटें और सुई का प्रयोग न करें। सोना भी नहीं चाहिए और इसके अतिरिक्त धार्मिक पुस्तकें पढ़ें, गीता रामायण का पाठ करें। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा राहु से पीड़ित हो केतु से पीड़ित हो या फिर चंद्रमा शनि के साथ विष दोष उत्पन्न हो रहा हो ऐसे जातकों को चंद्र ग्रहण के दिन सफेद वस्तुओं का दान करना शुभ फल कारक होगा।

किस राशि पर लगेगा ग्रहण

हिंदू पंचांग अनुसार, चंद्र ग्रहण विक्रम संवत 2078 में कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन वृषभ राशि और कृत्तिका नक्षत्र में लगेगा। ऐसे में इस राशि और नक्षत्र में जन्मे लोगों पर ग्रहण का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। वृषभ राशि के जातकों को बेहद सतर्क रहना होगा। इस दौरान वाद-विवाद से बचें।

भारत में चंद्र ग्रहण का समय

भारतीय समयानुसार 19 अक्टूबर 2021 शुक्रवार को सुबह 11:34 मिनट से चंद्र ग्रहण प्रारंभ होगा जो शाम 05:33 मिनट पर समाप्त होगा।

इस वर्ष पड़ेंगे कुल चार ग्रहण

इस वर्ष दो चंद्रग्रहण (Longest Lunar Eclipse) पड़ने हैं, जिसमें से एक चंद्रग्रहण बीते 26 मई को लग चुका है। अब इस महीने साल का यह दूसरा और आखिरी चंद्रग्रहण (Longest Lunar Eclipse) है। इस वर्ष में कुल मिलाकर कुल चार ग्रहण पड़ने हैं, जिनमें दो चंद्रग्रहण और दो सूर्यग्रहण शामिल हैं। साल का आखिरी सूर्यग्रहण अगले महीने चार दिसंबर को पड़ेगा।

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