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चम्पावत फिर आने का वादा इसलिए कर गए उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जानिए बड़ा कारण…

सौरभ बजाज, चम्पावत, Newsjunction24.com

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए सदन में पहुंचाने के लिए एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। वह है चम्पावत विधानसभा सीट…। खटीमा विस सीट से चुनाव हार चुके पुष्कर सिंह धामी को भाजपा हाईकमान ने फिर से मुख्यमंत्री बना दिया। जब मुख्यमंत्री बन गए तो यह तय हो गया कि धामी के लिए छह माह में सदन का सदस्य बनना जरूरी है। ऐसे में सीट खोजी गई और चम्पावत सीट को धामी के लिए मुफीद मानते हुए चुना गया। यहां से जीते भाजपा के कैलाश गहतोड़ी से इस्तीफा दिलाकर भाजपा ने धामी के लिए चुनाव का रास्ता प्रशस्त किया। यह सीट धामी के लिए इसलिए भी चुनी गई क्योंकि पुरानी सीट खटीमा से चम्पावत सीट की सीमा लगी हुई है। अब धामी चुनावी समर में हैैं और 31 मई 2022 को मतदान होना है। उनके सामने कां्रग्रेस की निर्मला गहतोड़ी ताल ठोंक रही हैैं। धामी के चुनाव की कमान यहां से इस्तीफा देने वाले कैलाश गहतोड़ी ने संभाल रखी है। बीच-बीच में धामी भी यहां प्रचार के लिए पहुंचते रहे हैैं। अंतिम चरण में अब भाजपा के प्रत्याशी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आना पड़ा। यूं तो आदित्यनाथ मूलत: उात्त्राखंड के ही रहने वाले हैैं, लेकिन दीक्षा लेने के बाद वह योगी बन गए। गुरु गोरखनाथ के शिष्य योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर के मठाधीश हैैं और चम्पावत गुरु गोरखनाथ की तपस्थली रही है। इसलिए चम्पावत भाजपा के फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ के लिए अलग ही स्थान रखता है। धामी ने भी योगी को बुलाकर राजनीति का ब्रह्मïशास्त्र छोड़ दिया। योगी के आने की सूचना से जहां जबरदस्त जनसैलाब उमड़ा तो रोडशो करके योगी आदित्यनाथ उात्त्राखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए सदन का रास्ता साफ करते दिखे। योगी ने भी धामी की जमकर तारीफ कर संकेत दे दिया कि चम्पावत की जनता कोई विधायक नहीं बल्कि मुख्यमंत्री को चुन रही है। इस सौभाग्य को हाथ से जाने नहीं देना है। जीत तो तय हो गई है, लेकिन रिकार्ड मतों से जिताकर विरोधियों को बताने का समय है कि चम्पावत अब विकास की इबारत लिखने जा रहा है। धामी के साथ योगी ने रोडशो करके भाजपा के पक्ष में जबरदस्त माहौल बना दिया। यही नहीं यह संकेत भी दे गए कि धामी के जीतने के बाद वह चम्पावत का दौरा जरूर करेंगे और तब ही गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली के दर्शन करेंगे। कुल मिलाकर अब मतदाताओं को परिणाम की प्रतीक्षा है।

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