Uttrakhand news : रजिस्टर में सभी बेड फुल, चेकिंग की तो पता चला कि आधे खाली हैैं। इस अस्पताल में पकड़ा बड़ा खेल

 

काशीपुर : जिन्हें लोग इस वक्त धरती का भगवान समझ रहे हैैं, वह भी इतना गंदा खेल कर सकते हैैं। इसकी उम्मीद शायद नहीं की जा सकती है। लेकिन काशीपुर में एक अस्पताल में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है। जहां करीब आधे बेड खाली होने के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने प्रशासन को सभी बेड फुल होने की जानकारी देकर गुमराह कर दिया। यही नहीं बेड उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित शुल्क से ज्यादा रकम वसूली जा रही थी। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने स्पर्श अस्पताल के खिलाफ महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
प्रशासन ने काशीपुर में दस निजी अस्पतालों को कोविड इलाज के लिए अनुमति दी है। बीते दिनों मुख्यमंत्री व उच्चाधिकारियों के पास शिकायतें पहुंचीं थी कि कई निजी कोविड अस्पताल सरकार की गाइडलाइन को धता बताकर मनमर्जी से मरीजों को भर्ती कर रहे हैं। मरीजों से मनमाना पैसा वसूल किया जा रहा है। गुरुवार दोपहर कोरोना नोडल अधिकारी डा. अमरजीत साहनी व सीओ अक्षय प्रहलाद कोंडे ने टीम के साथ मुरादाबाद रोड स्थित स्पर्श अस्पताल पर छापा मारा। टीम ने भर्ती रजिस्टर को चेक  किया तो  सेचालकों की हकीकत सामने आ गई। रजिस्टर में सभी बेड फुल दर्शाए गए थे, जबकि कोविड वार्ड में  काफी     बेड खाली मिले। आइसीयू वार्ड में भर्ती रोगियों को उनके स्वजन  खुद ही  खाना व अन्य सामान स्वयं पहुंचा रहे थे,  यह नियमों का खुला उल्लंघन है।  जबकि स्टाफ  नदारद था।      टीम ने देखा कि सरकार की ओर से जारी की गई तमाम गाइडलाइन का उल्लंघन हो रहा था।

पीड़ित महिला मरीज के बेटे ने दर्ज कराया केस

बीते दिनों नगर निवासी एक युवक कोरोना पॉजिटिव अपनी मां को लेकर स्पर्श अस्पताल पहुंचा तो डाक्टरों ने बेड खाली नहीं होने की बात कही। युवक के काफी निवेदन करने पर डाक्टर मान गए, लेकिन उससे प्रतिदिन 55 हजार रुपये इलाज का खर्च मांगा गया। मान-मनौव्वल के बाद 45 हजार रुपये प्रतिदिन पर डाक्टर मान गए। दो मई को मां को भर्ती कर लिया गया। अगले दिन डिस्चार्ज करते समय 88 हजार रुपये का बिल थमा दिया। बाद में छूट देकर 53 हजार रुपये लिए गए। युवक ने बताया कि वह स्वयं कोरोना मरीज है और एक निजी अस्पताल में अपना इलाज करवा रहा है। उसने वाट््सएप के माध्यम से इंस्पेक्टर कोतवाली को तहरीर भेजी थी। मरीज की शिकायत व छापेमारी में मिली खामियों के आधार पर पुलिस ने संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।

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