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कोरोना में स्थगित रहेंगी काशी की रामलीला, मगर दुनिया फिर भी देखेगी पूरे 30 दिन। जानिए कैसे

न्यूज जंक्शन 24, बनारस।

कोरोना संक्रमण के कारण काशी की प्रमुख रामलीलाएं भले स्थगित रहेंगी, लेकिन डिजिटल प्लेटफार्म पर पूरी दुनिया 30 दिन लगातार रामलीला देखेगी। प्रतिदिन दो मिनट 20 सेकेंड के एपिसोड में प्रत्येक प्रसंग को दर्शाया जाएगा।
काशी घाट वॉक के ट्विटर हैंडल पर रामलीला का प्रसारण पहली से 30 अक्तूबर तक किया जाएगा। डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रसारण के लिए रामलीला की रिकार्डिंग शुरू हो चुकी है। विभिन्न पात्रों के संवाद भी डब किए जा रहे हैं। काशी घाट वॉक के प्रणेता, बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. वी.एन. मिश्रा ने बताया कि रामलीला का क्रम रामनगर की रामलीला के आधार पर निर्धारित किया गया है। वीडियो में दिखने वाले पात्र लुगदी से बने मुखौटे धारण किए दिखेंगे। उन्होंने बताया कि विदेशों में रामलीला करने वाले कलाकारों को भेजने के लिए मुखौटों के 35 सेट तैयार कर लिए गए हैं।

देंगे आठ हजार अमेरिकी डॉलर
प्रो. मिश्रा ने बताया कि बाजार में उतारने के लिए रामलीला के पात्रों पर आधारित मुखौटों का वृहद सेट भी तैयार किया गया है। एक सेट पर आठ हजार रुपये की लागत आ रही है। इन सेटों की मांग अमेरिका में रहने वाले एक एनआरआई ने भी की। पहला आर्डर होने के नाते उन्हें जब यह सेट नि:शुल्क भेंट करने का प्रस्ताव काशी घाट वॉक की ओर से दिया गया। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि कलाकार भी इन दिनों कठिन हालात से गुजर रहे हैं, इसलिए मैं आठ हजार रुपयों की जगह आठ हजार अमेरिकी डालर का भुगतान करूंगा ताकि और सेट तैयार करने में मदद मिले और कलाकारों को आमदनी भी हो।

काशी-विश्वनाथ को अर्पित होगा मुखौटों का पहला सेट
अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण की खुशी में विदेशी रामलीला कलाकारों को भेंट करने के लिए बनाए गए रामलीला के मुखौटे सबसे पहले काशी-विश्वनाथ मंदिर में अर्पित किए जाएंगे। 14 सितंबर को काशी-विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन मंदिर और मां गंगा को अर्पित करने के बाद मुखौटों का सेट 15 सितंबर के बाद किसी भी दिन रवाना कर दिया जाएगा। मुखौटों की पहली खेप जिन देशों को भेजी जाएगी, उनमें अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस, थाइलैंड, म्यांमार, कंबोडिया, फिलीपींस और श्रीलंका शामिल हैं। सेटों की मांग करने वालों में इंग्लैंड के एनआरआई दूसरे और ऑस्ट्रेलिया के तीसरे स्थान पर हैं। मुखौटों के साथ भेजे जाने वाले रामायण मैनुएल को 14 से बढ़ाकर 18 पेज कर दिया गया है। यह मैनुएल डॉ. संतोष द्विवेदी ने बनाया है।

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