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बरेली में स्कूल का होलोग्राम लगते ही 25 की नोटबुक हो जाती है 45 रुपये में

बरेली। निजी स्कूलों की कमाई का एक बड़ा जरिया बच्चों से ली जानी वाली फीस है। मगर जब बात कमीशन की आती है तो कॉपी, स्टेशनरी के जरिए कमाई का ग्राफ ऊपर चढ़ाया जाता है। शहर के बड़े किताब और स्टेशनरी विक्रेता स्कूलों को कमीशन देकर अभिभावकों को लौटते हैं।


   सीबीएसई और आईसीएसई स्कूल कोर्स के साथ साथ कॉपी, स्टेशनरी में भी जमकर कमाई करते हैं। स्कूल जबरदस्ती फिजूल की कॉपी लेने को दवाब मनाते हैं। सभी ने कापियों के ऊपर अपने स्कूल का होलोग्राम लगा दिया है। होलोग्राम लगते ही 25 रुपये की किताब 45 की हो जाती है। अगर कोई अभिभावक इनको लेने से मना करता है तो उनको किताबें देने से भी मना कर दिया जाता है। मजबूरी में अभिभावकों को स्टेशनरी लेनी पड़ जाती है। किताबों के साथ 18-18 कापियां दी जा रही हैं। जबकि 8 से ज्यादा कॉपी की जरूरत नहीं है। स्कूल वाले कॉपी पर ट्रांसपेरेंट कवर चढ़ाने को कह रहे हैं। ताकि उनकी होलोग्राम वाली कॉपी साफ दिख जाए। जो छात्र बिना होलोग्राम वाली कॉपी लेकर जाते हैं, उनकी फटकार लगाई जाती है।

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