हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल, बिहार के मोसीम और बरेली की रेखा किडनी देकर बचाएंगे एक-दूसरे का जीवनसाथी

बरेली। न हिन्दू न मुसलमान, यहां एक इंसान की मदद करता है इंसान। धर्म भले ही अलग हो लेकिन इंसानियत की परिभाषा सभी धर्म में एक है। धर्म के ठेकेदार दिलों में भले लाख नफरतें भर दें लेकिन हिन्दुस्तान की संस्कृति किसी न किसी रूप में कौमी एकता की मिसाल पेश कर ही देती है। यहां बात हो रही है बरेली के 34 वर्षीय आनंद विद्यार्थी व बिहार के किशनगंज निवासी 22 वर्षीय करिश्मा बेगम की। दोनों की दोनों किडनियां खराब हो गई हैं। आनन्द की पत्नी रेखा और करिश्मा का पति मोसीम अपनी अपनी किडनी देकर अपने अपने जीवनसाथी की जिंदगी बचाना चाहते हैं। मुसीबत ये थी कि आनंद का ब्लड ग्रुप अपनी पत्नी रेखा से मैच नहीं कर रहा। यही करिश्मा बेगम के साथ हुआ। उनका ब्लड ग्रुप पति मोसीम से मैच नहीं खा रहा। दोनों का इलाज मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल में इलाज के दौरान दोनों परिवार दोस्त बन गए। दोनों की पीड़ा एक ही थी। आनन्द का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है जो मोसीम से मैच कर गया। जबकि, आनंद की पत्नी रेखा का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव है जो करिश्मा से मिल गया। बस फिर क्या था दोनों परिवारों ने जाति-धर्म के भेद मिटाकर इंसानियत से इंसानियत का रिश्ता जोड़ लिया। एक-दूसरे के जीवनसाथी की जिंदगी बचाने को वे राजी हो गए। दोनों ने अपने-अपने जिले में डीएम से अंग प्रत्यारोपण की अनुमति मांगी। डीएम ने दोनों को अनुमति प्रदान कर दी है।

बतादें कि आनंद विद्यार्थी बरेली में ट्रांसपोर्ट का कारोबार करते हैं। उनकी स्कूलों में गाड़ियां भी चलती हैं। बीमारी की वजह से कारोबार प्रभावित हो गया। सप्ताह में दो बार आनन्द की डायलिसिस होती है। वहीं, मोसीम बिहार में टाइल्स का कारोबार करते हैं। एक साल पहले ही मोसीम ने करिश्मा से निकाह किया। शादी के तीन माह बाद ही करिश्मा की दोनों किडनी खराब हो गईं।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*