अब अंतरिक्ष के रहस्य सुलझाएगी सरोवर नगरी नैनीताल, जल्द शुरू होगी एशिया की सबसे बड़ी लिक्विड मिरर दूरबीन

अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में जल्द नैनीताल के नाम बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। मुक्तेश्वर स्थित देवस्थल में एशिया की सबसे बड़ी 4 मीटर इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (आईएलएमटी) की स्थापना लगभग पूरी हो चुकी है। करीब दस करोड़ की लागत से स्थापित हो रही दूरबीन का कार्य अंतिम चरण में है। इसकी कार्य योजना के लिए आज से भारत, बेल्जियम और कनाडा के वैज्ञानिक ऑनलाइन मंथन करेंगे। बेल्गो-इंडियन नेटवर्क फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स प्रोजेक्ट के तहत साल 2012 में आईएलएमटी के लिए एक प्रोजेक्ट तैयार किया गया। इसमें भारत, बेल्जियम के साथ कनाडा संयुक्त भागीदार बना। दूरबीन स्थापित करने के लिए यूरोपियन देशों में नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान एवं शोध संस्थान (एरीज) के अधीन देवस्थल पर अंतिम मुहर लगी। करीब आठ साल बाद यह प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों का दावा है कि अक्तूबर में यह शुरू हो जाएगी। मौजूदा वक्त में दूरबीन की स्थापना में ढाई सौ करोड़ तक लागत सामान्य है, लेकिन तीन देशों के सहयोग से बन रहा यह प्रोजेक्ट करीब आठ साल पुराना है इसलिए दस करोड़ लग रहा है। इससे पहले भारत ने बेल्जियम की मदद से एशिया की सबसे बड़ी 3.6 मीटर प्रकाशीय दूरबीन भी यहां स्थापित की है। जानिए लिक्विड मिरर दूरबीन के बारे में एरीज के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि मिरर दूरबीन सीमित आकाशीय क्षेत्र में लंबे अध्ययन के लिए प्रयोग होती है। दुनिया में फिलहाल यह अभी चिली और कनाडा के पास ही है। लेंस में मरकरी इस्तेमाल होने से यह दर्पण की तर्ज पर काम करता है। इससे टकराकर लौटने वाले प्रकाश को कैमरे में कैद कर अध्ययन किया जाता है, इसलिए इसे लिक्विड मिरर दूरबीन कहा जाता है। इसके तहत किसी तारामंडल या समूहों पर 5 वर्ष तक नजर रखी जाती है। इससे ब्रह्मांड को और करीब से जानने का मौका मिलेगा। तीन दिनी ऑनलाइन कार्यशाला भारत, कनाडा और बेल्जियम के वैज्ञानिक मिरर दूरबीन की कार्य योजना पर तीन दिन तक ऑनलाइन कार्यशाला में विमर्श चलेगा। इसमें विभिन्न स्थानों से सौ से अधिक प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। हालांकि कार्यशाला में जुड़ने के लिए तीन सौ से अधिक लोगों ने इच्छा जताई है। मगर जूम एप के जरिए सिर्फ सौ लोगों ही जोड़ा जा सकेगा। इन विषयों पर होगा शोध देवस्थल में एशिया की बड़ी दूरबीन स्थापित होने के बाद स्टार गठन, तारा समूहों, आकाशीय पिंडों की खोज, बाइनरीज स्टार्स, आकाशगंगाओं, सक्रिय गांगेय नाभिक, गुरुत्वाकर्षण लेंस प्रणाली समेत अनेक अनसुलझे अंतरिक्ष विषयों के शोधों को आगे बढ़ाया जाएगा। एरीज के निदेशक प्रोफेसर दीपांकर बनर्जी ने बताया कि देवस्थल में दो बड़ी दूरबीन लगाने के बाद अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में भारत का अंतर्राष्ट्रीय कद बढ़ेगा। 3.6 मीटर प्रकाशीय दूरबीन के बाद लिक्विड मिरर टेलिस्कोप लगाना बड़ी उपलब्धि है। इसके बेहतर परिणाम जल्द मिलेंगे।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*