लंदन पुलिस ने माल्या को पकड़ा, कुछ देर में ही दे दी जमानत, जानिए क्यों…

London बैंकों के नौ हजार करोड़ रुपये हजम कर भारत से भागने वाले विजय माल्या को लंदन पुलिस ने फिर गिरफ्तार कर लिया। बाद में उसे इस शर्त पर जमानत दी गई कि वह चार दिसंबर को ट्रायल शुरू किए जाने के दौरान अदालत में मौजूद रहेगा। पुलिस का कहना है कि मनी लांड्रिंग के एक अन्य मामले में ये कार्रवाई की गई।


उल्लेखनीय है कि 61 वर्षीय शराब कारोबारी पहले से ही जमानत पर है। 18 अप्रैल को उसे स्कॉटलैंड यार्ड ने प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तार किया था।

-कुछ घंटों बाद उसे छह लाख पचास हजार पाउंड (करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये) के मुचलके पर सशर्त जमानत मिल गई थी। तब उसने अदालत को आश्वस्त किया था कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया से जुड़ी शर्तों का वह पूरी तरह से पालन करेगा।

-उधर, सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार की तरफ से माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर की जा रही कार्यवाही के तहत मंगलवार को उसकी गिरफ्तारी हुई।

-भारत सरकार की तरफ से पैरवी कर रही क्राउन प्रासीक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने अदालत को बताया कि बैंकों से धोखाधड़ी कर जुटाए गए पैसे को माल्या ने दूसरी जगहों पर लगाया। इसमें से कुछ पैसा फार्मूला वन टीम-फोर्स इंडिया में भी लगा हो सकता है।

-अदालत ने नया केस चलाने की अनुमति देते हुए कहा कि सुनवाई की समय सारिणी पहले की तरह से रहेगी। माल्या के वकीलों ने इसका विरोध किया, लेकिन सीपीएस की दलील थी कि नए आरोप पुराने मामले से जुड़े हैं। नए मामले पर बचाव पक्ष को इसी माह पक्ष रखना है।

-वेस्टमिंस्टर कोर्ट की चीफ मजिस्ट्रेट एम्मा लुईस ने बताया कि माल्या को जमानत उन्हीं शर्तों पर दी गई जिनके तहत उसे पहले छोड़ा गया था। माल्या का दो सप्ताह का ट्रायल चार दिसंबर से शुरू होगा।

-उधर, बैंकों से की गई धोखाधड़ी के मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है। एजेंसी ने माल्या व अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही बांबे हाई कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।

-मामले के अनुसार किंगफिशर एयर लाइंस के लिए शराब कारोबारी ने नौ हजार करोड़ रुपये का कर्ज बैंकों से हासिल किया था। मार्च 2016 में वह इसे चुकाए बगैर देश से भाग निकला था। उसके बाद से वह लंदन में है।

मैने कुछ गलत नहीं किया
अदालत के बाहर विजय माल्या ने कहा कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है। सारे आरोप मनगढ़ंत हैं। उसका कहना है कि अदालत को अपनी बेगुनाही के सारे साक्ष्य मुहैया करा दिए गए हैं। आरोपों पर पहले भी मेरा यही कहना था कि ये गलत हैं और आगे भी मैं ये बात कहूंगा।
मुश्किल है वापस लाना
भारत बार-बार ब्रिटेन से आग्रह कर रहा है कि वह माल्या को डिपोर्ट कर दे यानी देश से बाहर निकाल दे, लेकिन ब्रिटेन का कानून इस बात की इजाजत नहीं देता। दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि 30 दिसंबर, 1993 से अमल में आई। हालांकि भारत ब्रिटेन से माल्या के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग कर चुका है, यह प्रक्रिया आसान नहीं है। इस संधि का अनुच्छेद 9 आरोपी व्यक्ति को बचने के मौके देता है।

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