रीता बहुगुणा जोशी, राजबब्बर समेत 18 लोगों को कोर्ट का झटका, इस मामले में फंसे हैं यह दिग्गज

न्यूज जंक्शन 24, लखनऊ। एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष जज पवन कुमार राय ने धरना-प्रदर्शन के दौरान तोड-फोड़ व पुलिस बल पर हमला करने जैसे गंभीर एक आपराधिक मामले में रीता बहुगुणा जोशी, मधुसुदन मिस्त्री, निर्मल खत्री व प्रदीप जैन की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी। साथ ही इस मामले के सभी अभियुक्तों पर आरोप तय करने के लिए तीन अप्रैल की तारीख तय की है। बीते 20 फरवरी को विशेष जज ने राज्य सरकार की उस अर्जी को खारिज किया था, जिसमें इस मामले को जनहित में वापस लेने की मांग की गई थी। उन्होंने सरकार की अर्जी खारिज करते हुए इस मामले को गंभीर करार दिया था।

इस मामले में रीता बहुगुणा जोशी, राज बब्बर, प्रदीप जैन आदित्य, अजय राय, निर्मल खत्री, राजेश पति त्रिपाठी व मधुसुदन मिस्त्री समेत 18 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल है।

  1. यह है मामला

17 अगस्त, 2015 को इस मामले की एफआईआर एसआई प्यारेलाल प्रजापति ने थाना हजरतगंज में दर्ज कराई थी। उस रोज कांग्रेस पार्टी का लक्ष्मण मेला स्थल पर धरना-प्रदर्शन था। करीब पांच हजार कार्यकर्ताओं के साथ अचानक यह सभी अभियुक्तगण धरना स्थल से विधान सभा का घेराव करने निकल पड़े। इन्हें समझाने व रोकने का प्रयास किया गया लेकिन नहीं माने। संकल्प वाटिका के पास पथराव करने लगे जिससे भगदड़ मच गई। इस हमले में एडीएम पूर्वी निधि श्रीवास्तव, एसपी पुर्वी राजीव मल्होत्रा, सीओ ट्रैफिक अवनीश मिश्रा, एसएचओ आलमबाग विकास पांडेय व एसओ हुसैनगंज शिवशंकर सिंह समेत पुलिस के कई अधिकारी व पीएसी के कई जवान गंभीर रुप से घायल हो गए। अशोक मार्ग से आने व जाने वाले आम जनता को भी चोटें आई। कई गाडियों के शीशे टूट गए। कानून व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गया।

25 दिसंबर, 2015 को विवेचना के बाद पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ आईपीसी की कई गंभीर धाराओं व क्रिमिनल लाॅ अमेंडमेंट एक्ट की धारा में भी आरोप पत्र दाखिल किया था।

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