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अब नौकरी के साथ पार्ट टाइम पीएचडी भी कर सकेंगे, यूजीसी ने नियमों में किया बदलाव

न्यूज जंक्शन 24, नई दिल्ली। पढ़ाई करने के बाद पीएचडी करने की इच्छा है, मगर नौकरी करने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है तो अब इससे चिंतित होने की जरूरत नहीं है। यूजीसी का नया नियम आपकी यह इच्छा पूरी कर सकता है। यूजीसी के पीएचडी करने की शर्तों में कुछ बदलाव कर दिए हैं, जिसके तहत अब नौकरीपेशा लोग पार्ट टाइम पीएचडी भी कर सकेंगे (part time PhD along with job)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत सेंट्रल यूनिवर्सिटी और स्टेट यूनिवर्सिटी में ऐसे प्रोफेशनल को आगामी शैक्षणिक सत्र 2022-23 से पार्ट टाइम पीएचडी का मौका मिलने जा रहा है।

यूजीसी चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि इसके लिए यूजीसी काउंसिल ने पीएचडी नियमों में संशोधन किया है। 13 जून को आयोजित काउंसिल की बैठक में यूजीसी रेग्यूलेशन मिनिमम स्टैंडर्ड एंड प्रोसीजर फॉर अवार्ड ऑफ पीएचडी 2022 ड्रॉफ्ट (part time PhD along with job) को पास कर दिया गया है। इसमें आईआईटी और औद्योगिक संगठनों में काम करने वाले प्रोफेशनल को अपनी कंपनी या संस्थान से एनओसी लेनी होगी। यूजीसी चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि अब वर्किंग प्रोफेशनल अपनी नौकरी के साथ-साथ पार्ट टाइम पीएचडी कर सकेंगे। अगले सत्र से विश्वविद्यालयों, सीएसआईआर, आईसीएमआर, आईसीएआर आदि में इन्हीं नियमों के तहत पीएचडी में दाखिले होंगे। उच्च शिक्षण संस्थानों को पीएचडी सीटों का ब्यौरा वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

पीएचडी दाखिले के लिए 70 अंक लिखित और 30 अंक इंटरव्यू के रहेंगे। कम से कम 12 क्रेडिट और अधिक से अधिक 16 क्रेडिट होने अनिवार्य रहेंगे। उम्मीदवार अपनी थीसिस को पेटेंट और पीएचडी की रिसर्च फाइंडिंग को क्वालिटी जर्नल यानी पीर रिव्यू जर्नल में छपवा सकते हैं। उम्मीदवार चाहे तो कांफ्रेंस या सेमिनार में उसको प्रजेंट भी कर सकेगा। पीएचडी वाइवा ऑन लाइन होगा।

ये शिक्षक बन सकेंगे गाइड

फुल टाइम रैगुलर प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर पीएचडी करवा सकेंगे। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर को पीएचडी करवाने के लिए कम से कम पांच रिसर्च प्रकाशित होनी जरूरी होंगी। जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पांच साल तक टीचिंग, रिसर्च अनुभव के साथ तीन रिसर्च प्रकाशित होनी जरूरी रहेंगी। नए नियम में प्रोफेसर आठ से अधिक, एसोसिएट प्रोफेसर कम से कम छह और असिस्टेंट प्रोफेसर कम से कम चार पीएचडी स्कॉलर्स रख सकता है।

इसके अलावा विदेशी पीएचडी स्कालर मिलने पर दो स्कालर सुपर न्यूमेरी सीट के तहत रखे जा सकते हैं। पीएचडी छह साल में पूरी करनी होगी। कोई भी संस्थान दो साल से अधिक अतिरिक्त समय नहीं देगा। महिला उम्मीदवारों और दिव्यांगजनों (40 फीसदी से अधिक) को छह साल के अलावा दो साल अतिरिक्त समय देने का प्रावधान किया गया है। महिला उम्मीदवार को पीएचडी कार्यकाल में मैटरनिटी लीव, चाइल्ड केयर लीव के तहत 240 दिनों का अवकाश मिल सकता है।

अब यह होंगे नियम
  • विश्वविद्यालयों में वर्तमान में जारी व्यवस्था यानी तीन साल स्नातक और दो साल का पीजी करने वाले छात्र भी पीएचडी में दाखिला ले सकते हैं। उन्हें पीएचडी में दाखिले के लिए विश्वविद्यालयों या एनटीए की संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए पीजी प्रोग्राम में 50 या 55 फीसदी अंक होने अनिवार्य हैं।
  • चार वर्षीय स्नातक और एक साल के पीजी प्रोग्राम की पढ़ाई करने वाले छात्र भी पीएचडी में दाखिला ले सकते हैं। इन्हें भी पीएचडी दाखिले के लिए विश्वविद्यालयों या एनटीए की संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए पीजी प्रोग्राम में 50 या 55 फीसदी अंक होने अनिवार्य है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम के तहत रिसर्च या ऑनर्स प्रोग्राम के छात्र सीधे पीएचडी में दाखिले ले सकेंगे। लेकिन पीएचडी के लिए विवि की संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए सीजीपीए 7.5 से अधिक होना चाहिए।
  • विश्वविद्यालयों की कुल सीटों में से 60 फीसदी सीट नेट या जेआरएफ क्वालीफाई छात्रों के लिए आरक्षित रहेंगी।
  • विवि सिर्फ अपनी 40 फीसदी सीटों पर अपनी या एनटीए की संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा की मेरिट से दाखिला दे सकते हैं।
  • यदि 60 फीसदी सीटों के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते हैं तो फिर विवि खाली सीटों को 40 फीसदी ओपन सीटों से जोड़ सकेंगे।

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