बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने किया ‘घोटाला’, बुरे फंसे कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल

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न्यूज जंक्शन 24, देहरादून। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल (former state president of Congress Ganesh Godiyal) मुश्किलें में फंसते दिख रहे हैं। उन पर साल 2012 से 17 के बीच बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष रहने के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। यह आराेप उनके ही कार्यकाल में मंदिर समिति के सदस्य रहे आशुतोष डिमरी ने लगाए हैं। आशुतोष डिमरी ने कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत को पत्र लिखकर जांच कराने की मांग भी की है। शिकायत मिलने पर मंत्री ने मुख्य सचिव और धर्मस्व सचिव को पत्र लिखकर जांच के आदेश भी दे दिए हैं।

मंदिर समिति के सदस्य आशुतोष डिमरी ने शिकायती पत्र में लिखा है कि कांग्रेस शासनकाल में बदरीनाथ एवं केदारनाथ में भगवान की तिजोरी पर किस तरीके से डाका डाला गया है, इसका पुख्ता प्रमाण सामने दिखाई दे रहा है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के दो अधिकारियों ने मंदिर अधिनियम 1939 का खुलेआम उल्लंघन करते हुए भगवान के खजाने से करोड़ों लुटा दिए।

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आशुतोष डिमरी ने पत्र में लिखा है कि मंदिर समित के अधीन प्रदेश के विभिन्न क्षेत्राे में बने 45 मंदिर आते हैं। गणेश गोदियाल (former state president of Congress Ganesh Godiyal ) ने वर्ष 2015 में मंदिर समिति के पैसों से पोखरी में स्थित एक शिवालय का पुनर्निर्माण करवाया, जबकि यह शिवालय मंदिर समिति के अधीन ही नहीं था। इस मंदिर के निर्माण में बिना निविदा के काम करवाया गया, जिस पर 15 लाख रुपए खर्च हुए। यही नहीं, 2015 में ही गाेदियाल ने मंदिर समित के पैसों से जनपद टिहरी में एक सड़क बनवा दी। गोदियाल ने उस समय बिना अनुमति के कई सारी भर्तियां भी करवाई हैं, जिसका उल्लेख इस शिकायती पत्र में है। भगवान बदरीनाथ के प्रसाद के लड्डू में भी बड़ा गोलमाल किया गया है।

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सदस्य का कहना है बदरीनाथ में चौलाई के बद्रीश लड्डू का कार्य बिना निविदा के दिया गया। अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी ने चहेते उत्तर प्रदेश और वर्तमान में श्रीनगर के एक व्यवसाई को इस कार्य का जिम्मा दिया गया। इसके साथ ही अवर अभियंता अनिल ध्यानी को 2 वर्ष में ही कैसे अधिशासी अभियंता बना दिया गया इस पर भी सवाल उठते हैं।

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