ठग्स ऑफ इंटरनेट ने नया तरीका अपनाया, मोबाइल एप्लीकेशन के जरिये खाता कर रहे साफ


बरेली। ठग्स ऑफ इंटरनेट ने लोगों का पैसा उड़ाने का एक और नया तरीका खोज लिया है। बरेली में पिछले तीन महीने में कई लोगों के पैसे कुछ विशेष एप डाउनलोड करने के बाद उड़ गए। यह एप रिमोट एक्सेस ट्रोजॉन तकनीक  पर काम करते हैं। इसके जरिए आपके मोबाइल की स्क्रीन को हैकर अपने कंप्यूटर पर देख डाटा चोरी कर रहे हैं।
  इंटरनेट बैंकिंग और ऑनलाइन शापिंग का ग्राफ काफी तेजी से ऊपर जा रहा है। उतनी ही तेजी से ऑनलाइन ठगी का ग्राफ भी बढ़ रहा है। इंटरनेट के ठग लगातार नई-नई तकनीकें लाकर आम लोगों को चूना लगा रहे हैं। नया-नवेला तरीका रिमोट एक्सेस ट्रोजान तकनीक वाले एप हैं। ताजातरीन मामले में पीलीभीत बाईपास के सिद्धार्थ सिंह के एप डाउनलोड होने के बाद 19999 रुपये उड़ गए।

शास्त्रीनगर के प्रभात के खाते से भी 12 हजार रुपये उड़ा लिए गए। ऑनलाइन कंपनी के कस्टमर केयर के कहने पर अंकुर ने एनीडेस्क एप को डाउनलोड कर लिया। इसके बाद कंपनी के प्रतिनिधि ने उन्हें इस एप में अपनी बैंक कार्ड डिटेल भरने को कहा। चौकन्ने होने के कारण अंकुर सारा खेल समझ गए। उन्होंने तत्काल एनीडेस्क को अनस्टॉल कर दिया। तत्काल ही अपने क्रेडिट कार्ड का पासवर्ड भी बदल दिया। जबकि सिद्धार्थ और प्रभात इस एप के कारण अपना पैसा खो बैठे। 

रैट एप का हो रहा है दुरुप्रयोग
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन साइबर क्राइम एंड साइबर लॉ के चेयरमैन अनुज अग्रवाल ने बताया कि इंटरनेट के ठग रैट एप्लीकेशन का दुरुप्रयोग कर रहे हैं। रैट यानि कि रिमोट एक्सेस ट्रोजान के जरिए आप कहीं  भी बैठे-बैठे दूसरे के कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल कर सकते हैं। जो मान्यता प्राप्त एप हैं, उसमें स्क्रीन पर यह लिखकर आएगा कि कोई और इसका इस्तेमाल कर रहा है। ठगी के लिए जो रैट एप बनाए गए हैं, उनमें ऐसा कुछ भी लिखकर नहीं आता है। 

रैट एप डाउनलोड करने का देते हैं लालच
ठग विभिन्न तरह से आपको रैट एप डाउनलोड करने को प्रेरित करते हैं। एक बार जब आप यह एप्लीकेशन अपने मोबाइल में डाउनलोड कर लेते हैं तो फिर जो भी डिटेल भरेंगे वो ठगों को अपने सिस्टम पर नजर आएगी। महज पांच से सात मिनट में वो आपका पूरा एकाउंट खाली कर देते हैं। सबसे ज्यादा केस में ई-वालेट में पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। ई-वालेट में 20 हजार रुपये तक कोई चेकिंग बैरियर भी नहीं है। इस कारण ठग अलग-अलग नंबरों में 19999 रुपये भेज देते हैं। 

फर्जी कस्टमर केयर से हो रहा खेल
तमाम नामी-गिरामी कंपनियों के कस्टमर केयर नंबर है ही नहीं। ठगों ने गूगल पर इन कंपनियों के कस्टमर केयर नंबर डाल रखे हैं। लोग गूगल की हर बात को सही मान इन नंबरों पर फोन करते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं। मेरे केस में भी ऐसा ही हुआ। यदि मैं सजग नहीं होता तो मेरा खाता भी खाली हो जाता। 

मत दें यह जानकारी

  • कार्ड वेरिफिकेशन नंबर
  • कार्ड एक्सपायर डेट
  • पासवर्ड
  • इंटरनेट बैंकिंग लॉगिन
  • गोपनीय जानकारी
  • क्रेडिट/डेबिट कार्ड नंबरकार्ड का सीवीवी नंबर

इन बातों का ध्यान रखें खाताधारक

  • मोबाइल में कोई भी एप्लीकेशन डाउनलोड करने से पहले पूरी जानकारी ले लें।
  • गूगल पर लिखी हर बात का भरोसा नहीं करें। उसकी  भी हरसंभव पड़ताल करें।
  • नामी कंपनियों के कस्टमर केयर नंबर के लिए कंपनी की असली वेबसाइट पर जाएं।
  • मोबाइल पर किसी से भी अपने बैंक खातों या एटीएम से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करें।
  • अगर फोन पर किसी को धोखे से पासवर्ड बता दें तो तुरंत हेल्पलाइन पर फोन कर कार्ड डी-एक्टीवेट करा दें।
  • ऑनलाइन खातों और एटीएम-क्रेडिट कार्ड के पासवर्ड समय-समय पर बदलते रहें।
  • बैंक खातों के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए एक अलग ई-मेल एकाउंट बनाएं।

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