सुमित से राहुल ने मिलाया हाथ, विरोधियों की फूली सांस

हल्द्वानी में निकाय चुनाव में टिकट बंटवारे के बाद अपनों की नाराजगी झेल रही कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल करने में पूरी ताकत झोंक रखी है। सबसे पहले “अपनों” को मनाया जा रहा है ।नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के बेटे और कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी सुमित हृदयेश युवा कांग्रेस नेता राहुल सोनकर को उनके आवास पहुँचकर साथ लाने में कामयाब रहे। कुछ दिन पहले नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने पूर्व दर्जा मंत्री ललित जोशी को मनाया तो वहीं सुमित हृदयेश ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत गुट के राहुल सोनकर को मनाने में कामयाब हासिल की। इसे कांग्रेस का बड़ा डैमेज कंट्रोल माना जा रहा है।

विरोधियों पर भारी पड़ रहा सुमित का चुनावी मैनेजमेंट : पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य के कार्यकाल में राहुल सोनकर उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महत्वपूर्ण कम्युनिकेशन डिपार्टमेन्ट के कोऑर्डिनेटर थे। हरीश रावत के बेटे आनंद रावत के राहुल रणनीतिकार भी हैं साथ ही उनके कार्यक्रमों का मैनेजमेंट भी करते हैं। छात्र राजनीति में उनका अच्छी खासी पैठ है। सुमित ने एक तरह से राहुल को मनाकर युवाओं का वोट अपनी तरफ खींचा है। राहुल पूर्व मुख्यमंत्री के न सिर्फ करीबी हैं, बल्कि पूर्व दर्जा मंत्री और हाल ही में सुमित के चुनाव का विरोध करने वाले ललित जोशी के भी खास माने जाते हैं। सुमित ने राहुल के घर जाकर उन्हें मनाया और चुनाव में साथ मांगा। दोनों के बीच वार्ता के बाद राहुल ने कहा कि निकाय चुनाव में कांग्रेसी मजबूती के साथ खड़े हैं।

कांग्रेस वोट बैंक में मिलेगी मजबूती : सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के इस धड़े ने पिछले 6 सालों से हृदयेश परिवार से दूरी बना रखी थी, ऐन चुनाव से पहले इन्हें मनाकर विरोधियों को बड़ा झटका दिया है वार्ता के दौरान बाजार क्षेत्र के 2 बार से पार्षद एवं कांग्रेसी नेता महेंद्र नागर भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि राहुल को मनाने के पीछे महेंद्र का अहम रोल है।

विरोधियों में बढ़ी बेचैनी : डैमेज कंट्रोल के बाद विरोधियों में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि नाराजगी का दंश झेल रही कांग्रेस से कई पदाधिकारियों ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था। विरोधी इसे अपनी जीत मान रहे थे लेकिन नेता प्रतिपक्ष इंदिरा और सुमित हृदयेश ने रूठों को मनाकर चुनावी बिगुल फूंक दिया है।

आपको बता दें कि कांग्रेस के डैमेज कंट्रोल में अब्दुल मतीन सिद्दकी और सुहैल सिद्दकी के नाम भी सामने आ रहे थे। सुमित हृदयेश की दावेदारी से नाराज इन दोनों ने भी निर्दलीय चुनाव लडऩे का फैसला कर लिया था। दोनों ही मुस्लिम समुदाय से हैं और इस समुदाय में कांग्रेस का बड़ा वोट बैंक है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने दोनों को ही मना लिया और अब दोनों सुमित के चुनाव में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं।

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