बोले सेब उत्पादक:-सीएम साहब, बचा लीजिए देश-दुनिया में पसंद की जाने वाली उत्तराखंडी सेब की मिठास

न्यूज जंक्शन 24, हल्द्वानी।
देश-दुनिया में पसंद किए जाने वाले उत्तराखंड के उच्च हिमालयी सेब की मिठास अपने ही घर में उपेक्षा के चलते फीकी पड़ती जा रही है। इसको लेकर सेब उत्पादक से लेकर कारोबारियों के चेहरे की रंगत उड़ने लगी है। चिंता यहां तक बढ़ गई है कि सेब कारोबारियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सचेत भी कर दिया है।
हल्द्वानी मंडी समिति में आलू फल आढ़ती व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष व कुमाऊं के बड़े सेब कारोबारी जीवन सिंह कार्की ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सारा दर्द उड़ेल दिया। लिखा है कि उत्तराखंड का उच्च हिमालय सेब उत्पादन के लिए मुफीद माना जाता है। अगर इस पर थोड़ा सा भी गंभीर हो जाएं तो यही सेब उत्तराखंड की आर्थिकी का बहुत बड़ा आधार बन सकता है ।
लेकिन सरकारी उपेक्षा व जलवायु के अनुसार सेब की उत्पादित फसलों में चयन होने के कारण व उचित वैज्ञानिक सलाह और तकनीक न मिल पाने से उत्पादन व गुणवत्ता दोनों ही लगातार गिर रही है। जिस कारण कृषक सेब उत्पादन से विमुख हो रहा है। सरकार को सुझाव है कि जिस प्रकार देश देश में खाद्यान्न संकट को देखते हुऐ देश के कृषि विश्वविद्यालय द्वारा हरित क्रांति को जन्म दिया गया। ठीक उसी प्रकार उत्तराखंड के कृषि विश्वविद्यालय विशेष कर पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय को पर्वतीय क्षेत्रों में हार्टिकल्चर बागवानी क्रांति की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिये ।
कृषि वैज्ञानिकों को पर्वतीय क्षेत्रों में कृषकों के समुख जाकर, पर्वतीय क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार इसको विकसित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिये ।
उत्तराखंड सरकार को जमीन पर हॉटरीकल्चर व बागवानी आंदोलन को चलाने की इच्छा शक्ति दिखानी होगी । तभी सेब व अन्य हार्टिकल्चर व बागवानी उत्पादों की गुणवत्ता व उत्पादन दोनों को सुधारा जा सकता है।

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