25 साल से उर्दू पढ़ा रहा शिक्षक निकला फर्जी, परतें खुलीं तो सन्न रह गया शिक्षा विभाग। अब यह की कार्रवाई

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न्यूज जंक्शन 24, रुद्रपुर।

ऊधमसिंह नगर जिले में फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी करने वालों की परत-दर-परत उघड़ती जा रही है। किच्छा में बुधवार को ऐसे ही एक और मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है। हलद्वानी का रहने वाला एक युवक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 25 साल से नौकरी करता रहा। उसके प्रमाण पत्रों की जांच में खुलासा होने के बाद अब मुकदमा दर्ज कराया है।
उप खंड शिक्षा अधिकारी डॉ गुंजन अमरोही ने किच्छा की कोतवाली में सौंपी तहरीर में कहा है कि हलद्वानी के आजादनगर लाइन नम्बर 15 के रहने वाले मंसूर अहमद पुत्र जहूर अहमद उर्दू शिक्षक के पद पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय नौगवां में तैनात है। इसकी नियुक्ति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नैनीताल के स्तर से 30 सितंबर 1995 को की गई थी। उक्त कथित शिक्षक ने 12 अक्टूबर के लिए सहायक अध्यापक के पद पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय में चार्ज लिया। गोपनीय शिकायत के आधार पर मंसूर के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच की गई। प्रमाण पत्रों को परीक्षण के लिए क्षेत्रीय सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद बरेली को भेजा गया। वहां से मिली रिपोर्ट में जानकारी मिली कि मंसूर अहमद का इंटर का परीक्षाफल रद्द कर दिया गया था। इसके लिए तो अंकपत्र ही जारी नही किया गया था। इस तथ्य से उत्तराखंड शिक्षा विभाग के कान खड़े हो गए। यहां शिक्षा विभाग में मंसूर अहमद ने इंटरमीडिएट की अंकतालिका के आधार पर आगे की शिक्षा प्राप्त कर सहायक अध्यापक की नौकरी पाई है। जांच में यहीं पर मामला फंस गया कि जब इसको इंटरमीडिएट की अंकतालिका मिली ही नहीं तो उत्तराखंड में आगे की शिक्षा पाने के लिए अंकतालिका लगा कैसे दी। 26 जून को जिला शिक्षा अधिकारी ने फर्जी शिक्षक के खिलाफ आरोप पत्र निर्गत कर दिया और 10 जुलाई तक जवाब देने के लिए कहा। लेकिन उक्त फर्जी शिक्षक संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जिसके आधार पर उत्तराखंड सरकारी सेवक नियमावली 2003 के तहत इसे बर्खास्त कर दिया था। कोतवाली पुलिस ने इसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।