काम के दम पर ‘जग मोह’ रहे जगमोहन त्रिपाठी, ऊधमसिंह नगर में तैनात है ऐसा विरला अफसर

 

न्यूज जंक्शन 24, ऊधमसिंह नगर।

नाम जगमोहन त्रिपाठी। यानी ‘जग मोहन’ जैसा नाम वैसा ही काम। यह वो नाम है, जिसे ऊधमसिंह नगर के लोग अच्छी तरह सम्मान से याद करते हैं। किच्छा में बतौर तहसीलदार पद पर तैनात जगमोहन त्रिपाठी की पहचान ही ऐसी बन गई है कि जहां भी तैनात रहते हैं, वहीं अपनी छाप छोड़ देते हैं। जनता की समस्याओं का निदान उनकी प्राथमिकता रहती है, वह सरकारी ड्यूटी से हटकर लोगों के दुख-दर्द में सहभागी बनते हैं। यही वजह है कि लोग अपने-अपने क्षेत्रों में उनकी तैनाती को लेकर उत्सुक रहते हैं।

सितारगंज में तोड़ दी थी अवैध खनन और दलाली की कमर

सितारगंज में तैनाती के दौरान उनके द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ तहसील परिसर में तमाम स्लोगन लिखे गए और उस पर अमल भी कराया गया।
खुद उधम सिंह नगर की डीएम ने तहसील को भ्रष्टाचार मुक्त करने और आम जनता की शिकायतों को दूर करने के लिए तहसीलदार द्वारा चलाई गई इस मुहिम को खुलकर सराहा था।
उन्होंने सितारगंज तहसील में रहते हुए अवैध खनन पर नकेल कस रखी थी। छात्रों व जरूरतमंदों को जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए किसी दलालों के पास न जाने को जागरूक किया गया। उनके द्वारा जनहित में किए गए कार्यों की प्रशंसा जहां सामान्य लोग आज भी करते हैं तो माफियाओं के लिए वह बड़ी चिंता का कारण भी हैं।

खटीमा में खत्म की भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें, दिए जाते हैं उदाहरण

वह खटीमा में रजिस्ट्रार कानूनगो के पद पर रहे। यहां जिस तरह की हर सरकारी पटल पर भ्रष्टाचार की अंधी होड़ थी, उसको पूरी तरह खत्म कर दिया। इस क्षेत्र के आम जनमानस को तो एक बार के लिए यह भरोसा करना मुश्किल हो जाता है कि यहां गहरे तक जम चुकी भ्रष्टाचार की जड़ें खत्म भी हो सकती हैं। मगर जगमोहन त्रिपाठी ने यह काम बखूबी कर दिखाया। आज लोग उनके उदाहरण देते हैं।

अब किच्छा में लिख रहे लोकप्रियता की पटकथा

वह वर्तमान में अब किच्छा के तहसीलदार हैं। वह कहते हैं ईमानदारी से काम करने पर सम्मान और सफलता मिलती है। अधिकारियों को अपनी कार्यशैली के माध्यम से समाज को संदेश देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के पास लोग बहुत उम्मीद के साथ अपनी समस्या लेकर आते हैं। कई बार हर समस्या का समाधान तत्काल संभव नहीं हो पाता है। ऐसे मामलों में भी अधिकारी शिकायतकर्ता का विश्वास अपने बेहतर व्यवहार से जीत सकता है। शिकायतकर्ता को विश्वास दिलाना चाहिए कि उसका काम फिलहाल किस वजह से नहीं हो पाएगा। शिकायतकर्ता को महसूस होना चाहिए अधिकारी उसकी समस्याओं को लेकर गंभीर है, तभी अधिकारी के बारे में उनके मन में सम्मान का भाव पैदा होगा। वैसे हर हाल में पहली बार में ही समस्या का समाधान होना चाहिए। पहली बार में ही समस्या का समाधान होने पर विभाग के बारे में बेहतर संदेश जाता है। इससे सरकार के बारे में भी बेहतर संदेश जाता है। जब अधिकारी लोगों की नहीं सुनते हैं तो इसका सीधा असर सरकार पर होता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यशैली से सरकार के बारे में लोगों की राय बनती है। विकास की गति तभी तेज होती है, जब अधिकारी एवं कर्मचारी पूरी ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

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