नेपाल से भारत को मिला एक और झटका – नेपाल देगा 7 साल बाद भारतीयों को नागरिकता


नेपाली संसद की ओर से विदेशी महिलाओं को 7 वर्ष बाद नागरिकता देने वाले विधेयक का भारत व नेपाल में बुधवार को दूसरे दिन भी विरोध जुलूस निकाला गया। सुबह नेपालगंज में जनता समाजवादी पार्टी नेपाल की ओर से विशाल जुलूस निकालकर जिला प्रशासन बांके के सामने धरना दिया गया। प्रदर्शन में सहभागी नेता कार्यकर्ता नारे लगा रहे थे- संशोधित नागरिकता विधेयक खारेज गर, नेपाली बुहारी लाइ नागरिकता विहीन गर्न पाइन्दैन।
प्रदर्शन में सहभागी पार्टी के युवा नेता दुर्गेश गुप्ता ने धरने में मौजूद कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि नेपाल सरकार की ओर से लाए गए इस विधेयक से नेपाल भारत के बीच सदियों से चले आ रहे रोटी बेटी के सम्बंधों पर असर पड़ेगा। बांके की महिला नेत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दूसरे देशों से विवाह कर आने वाली बहुओं को सात वर्ष बाद नागरिकता देने का विधेयक नेपाली संविधान के मूल मर्म व भावना के विपरीत है। नेपाल- भारत के बीच युगों से चले आ रहे रोटी- बेटी व सांस्कृतिक संबंधों पर इसका काफी असर पड़ेगा।
आज नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार चीन की तर्ज पर एकात्म व एक पार्टी शासन का अभ्यास कर रही है। ये लोग नारे लगा रहे थे मधेशी एकता जिन्दाबाद, जनमत पार्टी जिन्दाबाद। प्रतिनिधि सभा में पास होने के बाद प्रस्ताव जब राष्ट्रीय सभा में गया तो कांग्रेस के सांसद जितेन्द्र नारायण देव ने खुलकर इस प्रस्ताव का विरोध किया। प्रमुख रूप से प्रदर्शन में राकेश यादव, जाहिद खान, कलामुद्दीन खान, समीर हाश्मी, शंकर गोड़िया, बलिराम मौर्य, दिलशाद खान, सालिकराम व रामचन्द सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

चीन की शह पर भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त है नेपाल
रुपईडीहा। लोगों का कहना है कि चीन के इशारे पर नेपाल की वर्तमान कम्युनिस्ट सरकार एक के बाद एक भारत विरोधी कार्यकलापों मे लगी हुई है। जिससे नेपाल के मधेशियों क्षेत्रों में भारी रोष व्याप्त है। अभी पूरी दुनिया कोविड- 19 को लेकर खस्ताहाल है। लाखों लोग काल कवलित हो चुके हैं। इसी समय चीन की चाल में पाकिस्तान तो था ही, अब नेपाल भी आ गया है। नेपाल ने कालापानी, लिम्पियाधुरा व लिपुलेक को अपने नए नक्शे में दर्शाकर इसका प्रस्ताव पारित किया। नेपाल की प्रतिनिधि सभा ने भारत से शादी होकर गई महिलाओं को सात साल बाद नागरिकता का अधिकार देने का दूसरा प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव का भारत- नेपाल में भारी विरोध हो रहा है। इस प्रस्ताव ने तो आग में घी का काम किया है। भारत से व्याह कर गईं वधुओं को अब नागरिक होने के लिए 7 साल का इंतजार करना होगा। इसे लेकर नेपाल की जनता पार्टी बांके शाखा की ओर से नेपाल के प्रमुख मार्गों से होते हुए एक विशाल रैली नेपालगंज में निकाली गई।

5 सौ वर्ष पुराने मधुर सम्बंधों पर कुठाराघात


नेपाल की जनता पार्टी बांके के जिला सेक्रेटरी देवराज मौर्य ने प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस विधेयक से भारत सहित अन्य देशों की किसी भी महिला से विवाह कर नेपाली नागरिक लाया गया, तो उस महिला को सात वर्षों तक नागरिकता नहीं दी जाएगी। यह विधेयक सभी मधेशी आम जनसमुदाय तथा भारत- नेपाल के बीच पांच सौ वर्षों से अधिक पुराने मधुर सम्बंधों पर कुठाराघात है। इन रोटी- बेटी के पवित्र सम्बंधों को नेपाल सरकार ने तोड़ने का षडयंत्र किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों से नेपाल सरकार मधेशी जन समुदाय को लक्षित कर अनेक षडयंत्र कर रही है।

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