प्रियंका गांधी से मिलने लखनऊ आए राजस्थान के बेराजगार युवाओं को कांग्रेसियों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

लखनऊ। यूपी में अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियां अपना आधार बनाने में जुट गई हैं। सरकार को घेरने के लिए विरोधी पार्टियां जहां उन पर आरोप पर आरोप लगाए जा रही हैं, ताे वहीं अपनी पार्टी की कमियों को जनता से छुपाने का प्रयास भी कर रही हैं। कांग्रेस की हालत ऐसी ही है। दो दिनों से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लखनऊ से लेकर लखीमपुर खीरी तक सरकार पर निशाना साधकर उसे नाकाम बता रही हैं और पंचायत चुनाव में सरकार पर हिंसा भड़काकर चुनाव जीतने का आरोप लगा रही हैं, मगर शनिवार को उनकी पार्टी के शासित राज्य राजस्थान से कुछ बेरोजगार वहां की सरकार की शिकायत लेकर प्रियंका गांधी से मिलने पहुंचे तो कांग्रेसियों ने प्रियंका गांधी के अहिंसा का पाठ भूलकर बेरोजगार युवाओं की पिटाई कर दी।

राजस्थान सरकार वहां कंप्युटर शिक्षकों की भर्ती संविदा पर कर रही है। इसके खिलाफ वहां के युवा आंदोलनरत हैं। शुक्रवार को ही अपनी मांग लेकर वह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मिलने लखनऊ आ गए। मगर शुक्रवार की रात प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के भीतर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीट दिया। इसमें कई युवा घायल भी हो गए। लेकिन, इसके बावजूद वे लखनऊ से वापस नहीं गए। उनका कहना है कि राजस्थान के चुनाव में कांग्रेस का समर्थन किया था। इसलिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को अपनी व्यथा सुनाए बिना यहां से नहीं जाएंगे। प्रियंका ने शुक्रवार को अपने कार्यकर्ताओं को अहिंसा का पाठ पढ़ाया। पंचायत चुनाव में सरकार पर हिंसा फैलाने का आरोप लगाते हुए उसकी आलोचना की। लेकिन, पार्टी कार्यकर्ता कुछ ही घंटे में इस पाठ को भूल गए।

राजस्थान से आए बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव ने बताया कि उनके राज्य में कंप्युटर अनुदेशक के 10453 पद निकले हैं। प्रियंका गांधी कह चुकी हैं कि संविदा पर भर्ती बेरोजगारों का अपमान है। फिर यह काम कांग्रेस शासित राजस्थान में क्यों हो रहा है। उपेन का कहना है कि शुक्रवार को पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उन्हें प्रियंका से मिलवाने का आश्वासन देते रहे। रात में कुछ कार्यकर्ता आए और उन पर राजनीतिक दल के इशारे पर आने का आरोप लगाकर चले जाने को कहा। जब बेरोजगार युवा नहीं माने तो उन्हें बुरी तरह से पीटा गया। इन युवाओं ने पिटाई के दौरान अपने चोट के निशान भी दिखाए। कहा कि किसी अन्य पार्टी के इशारे पर आए होते तो एक महीने से दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर धरना नहीं दे रहे होते। वहीं, कांग्रेस के प्रवक्ता अशोक सिंह ने पीसीसी मुख्यालय में युवाओं को पीटे जाने की घटना से भी इन्कार किया है।

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