बरेली: इस दिवाली पटाखा बिक्री की अनुमति नहीं मिली तो मंदी की मार झेलेगा पटाखा बाजार

Bareilly. दिवाली से पहले पटाखों की बिक्री में अनुमति का पेंच फंसने से व्यापारी टेंशन में आ गए हैं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल और प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि अगर इजाजत नहीं मिली तो मंदी की मार से बेहाल कारोबारियों को एक और बड़ा झटका लगेगा।


  पटाखों-आतिशबाजी का बाजार लगवाने को लेकर इस बार प्रशासन काफी ऐहितयात बरत रहा है। पंजाब में हुए हादसे के कारण सुभाषनगर में रेलवे लाइन के पास लगने वाले अस्थाई बाजार को तो इस बार इजाजत ही नहीं दी जा रही है। पिछली बार के मुकाबले इस बार परमीशन के लिए मानकों को और भी ज्यादा कड़ा कर दिया गया है। इस कारण भी बहुत से कारोबारियों को बिक्री की इजाजत नहीं मिल पा रही है। इससे व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि हम लोग मोटा रुपया खर्च कर माल खरीद चुके हैं। अब अगर इजाजत नहीं मिली तो हम लोगों का बड़ा नुकसान होगा। प्रशासन अगर छह महीने पहले हम लोगों से वार्ता कर बिक्री की नई जगह तय कर लेता तो आज यह समस्या खड़ी नहीं होती। परमीशन नहीं मिलने के कारण व्यापारी अब नेताओं के यहां भी चक्कर लगा रहे हैं।

पटाखा कारोबारियों की दिक्कत समझे प्रशासन
पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के मंडल प्रभारी आशीष सिंघल ने कहा कि प्रशासन को पटाखा कारोबारियों की परेशानी समझनी चाहिए। मंदी का मारे व्यापारी के सामने यही व्यापार का वक्त है। शहर में जहां-जहां भी बाजार लगने हैं, वो जल्द से जल्द तय होना चाहिए। व्यापारियों को पारदर्शिता के साथ परमीशन दी जानी चाहिए।

पटाखे भी सरकार ही बेच ले
प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री सुदेश अग्रवाल ने कहा कि दिवाली के  वक्त हर बार परमीशन को लेकर दिक्कत आती है। लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। मगर इस बारे में छह महीने पहले से ही कवायद होनी चाहिए। इतने ही नियम-कानून बनाने हैं तो सरकार खुद ही पटाखे बेच ले।

सुरक्षा सर्वोपरि मगर व्यापारी का रखें ध्यान
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के महानगर अध्यक्ष शोभित सक्सेना ने कहा कि प्रशासन की सुरक्षा संबंधी चिंता जायज है। हर जगह पटाखे बेचने की इजाजत भी नहीं दी जा सकती है। मगर प्रशासन को व्यापारी का भी ध्यान रखना होगा। परमीशन के नाम पर व्यापारी को बार-बार दौड़ाना नहीं चाहिए।

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