Haldwani : हाई कोर्ट के आदेश से गफूरबस्ती के अतिक्रमणकारियों में फिर बढ़ी खलबली, क्या कहा कोर्ट ने

नैनीताल। हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अवैध तरीके से काबिज लोगोंं की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। हाई कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में रेलवे को आदेश दिया है कि वह अतिक्रमणकारियों पर तीन महीने के भीतर पीपी एक्ट के तहत कार्रवाई करे। इसके साथ ही डीएम को भी आदेश दिया है कि जमीन पर हुए कब्जे को लेकर सर्वे कराए और सात अप्रैल तक उसकी रिपोर्ट काेर्ट में पेश करे। रेलवे इस दौरान सभी नोटिसों पर सुनवाई पूरी करेगा।

बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया है। रविशंकर जोशी ने अपनी याचिका में कहा था कि गफूरबस्ती में रेलवे की भूमि पर 4365 अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है। इस पर हाई कोर्ट ने नौ नवंर 2016 को अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। जिसके बाद अतिक्रमणकारी इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को तीन महीने में अतिक्रमणकारियों के प्रार्थना पत्रों की सुनवाई के बाद कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके लिए उसे 31 मार्च 2020 तक का समय मिला था। लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होने पर रविशंकर जोशी ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की तो रेलवे ने कोर्ट ने समय की मांग की है कि उनको कुछ समय और दिया जाए।

रेलवे ने 1581 लाेगों को दिया था नोटिस

रेलवे प्रशासन ने जनवरी में हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास गफूरबस्ती, नई बस्ती समेत अन्य क्षेत्रों में बसे 1581 लोगों को बेदखली का नोटिस दिया था। इसके लिए रेलवे अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर 35 से ज्यादा स्थानों पर नोटिस चस्पा किए थे। अतिक्रमणकारियों को कब्जा हटाने के लिए 15 दिन का समय भी दिया गया था।

14 साल पहले चला था अभियान

रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए करीब 14 साल पहले बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया था। 2016 में रेलवे ने सीमांकन कर अपने हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों में पीलर लगाए थे। मामले में राज्य संपदा अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल में करीब चार साल पहले सुनवाई शुरू हुई थी।

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