कविता:::घर में बैठे -बैठे रोना आता है

घर में बैठे बैठे रोना आता है
बाहर निकलो कोरोना हो जाता है

हर इंसान शिकार हो गया
नाकारा बेकार हो गया
एक विषाणु के हमले से
जग सारा बीमार हो गया
हाथ मिलाने से भी जी घबराता है
बाहर निकलो………

भारत सबसे क्षमाशील है
सबसे ज्यादा विनयशील है
सारा विश्व देखता हमको
वो विकसित ये विकासशील है
देश मेरा बचता है और बचाता है
बाहर निकलो………

हमसे हैं वन हमसे जंगल
हमसे पृथ्वी हमसे बादल
हमी पराजित करेंगे कोविड
हमी विश्व मे करेंगे मंगल
और भरोसा खुद पर बढ़ता जाता है
बाहर निकलो……

-डॉ आदर्श पाण्डेय
विभागाध्यक्ष
वनस्पति विज्ञान विभाग
एसएस कॉलेज शाहजहाँपुर
उत्तर प्रदेश
फोन 9412193225
[email protected]

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