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काशी में विराजित हुई मां अन्नपूर्णा की दुर्लभ प्रतिमा, सीएम योगी ने की प्राण प्रतिष्ठा

न्यूज जंक्शन 24, लखनऊ। 108 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सोमवार सुबह मां अन्नपूर्णा (Maa Annapurna) की दुर्लभ प्रतिमा श्रीकाशी विश्वनाथ धाम पहुंच गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमा यात्रा की अगवानी की। भव्य स्वागत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यजमान बने। उन्होंने ही प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की। इसके पहले अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने पूजा पाठ की कमान संभाली थी और सुबह 6:00 बजे से शुरू हुए अनुष्ठान में पंचांग पूजन में गणेश अंबिका पूजन के साथ ही कलश स्थापना इत्यादि पूरी करने के बाद माता अन्नपूर्णा (Maa Annapurna) की प्रतिमा को अपने स्थान पर स्थापित किया गया।

मां अन्नपूर्णा (Maa Annapurna) की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक दल काशी विद्वत परिषद की निगरानी में कराई गई। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर मां के जयकारे और हर-हर महादेव के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि बाबा विश्वनाथ की रंगभरी एकादशी की पालकी यात्रा की रजत पालकी और सिंहासन माता के स्वागत के लिए भेजा गया। मां ज्ञानवापी के प्रवेश द्वार से इसी पालकी में सिंहासन पर विराजमान होकर काशी विश्वनाथ धाम में प्रवेश कीं।

राजाओं को कराई जाने वाली प्रक्रिया से हुई पूजा

इस पूरी प्रक्रिया को पूर्ण कराने वाले काशी विद्वत परिषद के महामंत्री पंडित राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि राजोपचार विधि के साथ माता अन्नपूर्णा (Maa Annapurna) की इस प्रतिमा की स्थापना की गई है। राजोपचार वह विधि होती है जो राजाओं के लिए पूर्ण की जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि माता अन्नपूर्णा को काशी की रानी रानी माता पार्वती के रूप में पूजा जाता है। देवाधिदेव महादेव की नगरी में माता अन्नपूर्णा का आना और माता अन्नपूर्णा (Maa Annapurna) की स्थापना होना अपने आप में अद्भुत है।

108 साल पहले हो गई थी चोरी

यह वही प्रतिमा है जो कनाडा में एक म्यूजियम में रखी हुई मिली थी। वाराणसी के घाटों से 108 साल पहले चोरी हुई उस प्रतिमा को कनाडा के म्यूजियम में देखकर एक महिला ने भारत सरकार से संपर्क किया था, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से सांस्कृतिक मंत्रालय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रतिमा को भारत लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज यह प्रतिमा पूरे विधि-विधान अनुष्ठान के साथ वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित की गई है, जिसकी पूरी प्रक्रिया खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निभाई।

मां की प्रतिमा का जगह-जगह स्वागत

कनाड़ा से यह प्रतिमा दिल्ली लाई गई। फिर दिल्ली से 11 नवंबर को रवाना होने के बाद काशी पहुंचने के दौरान मां की प्रतिमा अलीगढ़, लखनऊ, अयोध्या, जौनपुर समेत यूपी के 18 जिलों से गुजरी। दिल्ली से काशी आई माता की प्रतिमा का सोमवार को नगर भ्रमण के दौरान जगह-जगह स्वागत किया। जगह-जगह पुष्प वर्षा, डमरू दल, घंटा घड़ियाल बजाकर माता की रास्ते भर आरती उतारी गई। आज सुबह भी वाराणसी में दुर्गाकुंड मंदिर से माता की प्रतिमा की शोभायात्रा निकली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ माता की आरती उतारकर उनकी अगवानी की। इस दौरान माता को चांदी का मुकुट, सोने की हार एवं कंगन अर्पित कर श्रृंगार एवं पूजन किया।

ऐसी है मां की प्रतिमा

बलुआ पत्थर से बनी मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा 18वीं सदी की बताई जाती है। मां एक हाथ में खीर का कटोरा और दूसरे हाथ में चम्मच लिए हुए हैं। प्राचीन प्रतिमा कनाडा कैसे पहुंची, यह राज आज भी बरकरार है। लोगों का कहना है कि दुर्लभ और ऐतिहासिक सामग्रियों की तस्करी करने वालों ने प्रतिमा को कनाडा ले जाकर बेच दिया था। काशी के बुजुर्ग विद्वानों को भी मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा के गायब होने की जानकारी नहीं है।

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