कल मनेगा दशहरा, आप भी करें ये दो उपाय, हमेशा होगी जय, जीवन में धन-धान्य की होगी प्राप्ति

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Dussehra 2022
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न्यूज जंक्शन 24, हल्द्वानी। कल दशहरा (Dussehra 2022) है। बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार दशहरा का यह पर्व हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि दशहरे के मौके पर ऐसे उपाय, जिसे करने से आपकी हमेशा जय होगी। यह उपाय दो वृक्षाें की पूजा का है। दशहरे (Dussehra 2022)  के दिन इन वृक्षों की पूजा करना शुभ माना जाता है। इससे जीवन में धन-धान्य की प्राप्ति भी होती है।

शमी का पेड़

पुराणों में कहा गया है कि लंका पर विजय पाने के बाद श्रीराम ने शमी पूजन किया था। नवरात्र में भी मां दुर्गा का पूजन शमी वृक्ष के पत्तों से करने का विधान है। गणेश जी और शनिदेव, दोनों को ही शमी बहुत प्रिय है। मान्यता है कि दशहरे के दिन अगर शमी के पेड़ की पूजा की जाए तो वह काफी शुभ होता है। साथ ही साथ दुश्मनों पर विजय प्राप्ती होती है, घर में सुख-संपत्ति आती है और बाहरी यात्राओं का लाभ भी बनता है।

शमी का वृक्ष घर के ईशान कोण (पूर्वोत्तर) में लगाना लाभकारी माना गया है। घर में शमी के पेड़ की पूजा करने के लिए सबसे पहले पूजा की थाल तैयार करें और शमी के पेड़ की जड़ में पानी चढाएं। इसके बाद पेड़ पर मौली बांधें और रोली-चावल-हल्दी लगाएं। इसके बाद दीपक और अगरबत्ती जलाएं और पेड़ की आरती करें। प्रसाद और नारियल चढ़ाने के बाद पेड़ के आगे सिर झुकाएं और परिक्रमा करें।

अपराजिता का पौधा

दशहरे के दिन अपराजिता के पेड़ या उसके फूलों की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। अपराजिता पेड़ या फूल को देवी अपराजिता का रूप माना जाता है। अपराजिता की पूजा करने का सबसे अच्छा समय समय के हिंदू विभाजन के अनुसार अपराह्ण समय है। जीत के लिए देवी अपराजिता की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान राम ने राक्षस रावण को हराने के लिए लंका जाने से एक दिन पहले विजयादशमी पर देवी अपराजिता की पूजा की थी। कोई भी यात्रा करने से पहले देवी अपराजिता की पूजा की जाती है क्योंकि उनका आशीर्वाद यात्रा के उद्देश्य को पूरा करने और यात्रा को सुरक्षित बनाने में मदद करता है।

विजयादशमी के दिन अपराजिता पौधे की पूजन करने से विजय प्राप्त होती है। अगर घर में या घर के आसपास पेड़ नहीं है तो घर में पूजा वाली जगह के पास चंदन से आठ कोण दल बनाएं और उसके बीच में अपराजिता के फूल या पौधे रखें। इसके बाद उनकी विधिवत पूजा करें और प्रार्थना करें।

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