सावन में शिव पूजा कर रहे हैं तो रखे इन बातों का ध्यान, इन चीजों का कभी न करें अर्पण, नहीं तो होगा नुकसान

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न्यूज जंक्शन 24, हल्द्वानी। 14 जुलाई यानी आज से सावन महीना शुरू हो गया है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित है और इस पूरे महीने शिव भक्त भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। शास्त्रानुसार इन दिनों शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत, शमीपत्र आदि अनेक शुभ वस्तुएं चढ़ाने से शंकर भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं। वहीं कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिन्हें शिवजी की पूजा में वर्जित बताया गया है। इसलिए इन चीजों का उपयोग शिव आराधना के दौरान बिल्कुल नहीं करना चाहिए। शिवपुराण में इसे लेकर विस्तार से बताया गया है। तो आइए यहां आपको उन चीजों के बारे में बता रहे है, जिन्हें भूलकर भी शिव पूजा के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

तुलसी : भगवान शिव की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग वर्जित माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने तुलसी वृंदा के पति असुर जालंधर का वध किया था। इसलिए उन्होंने स्वयं भगवान शिव को अपने अलौकिक और दैवीय गुणों वाले पत्तों से वंचित कर दिया।

हल्दी : शिव जी को कभी हल्दी भी नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि हल्दी को स्त्री से संबंधित माना गया है और शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है। ऐसे में शिव जी की पूजा में हल्दी का उपयोग करने से पूजा का फल नहीं मिलता है। इसी वजह से शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है। ये भी मान्यता है कि हल्दी की तासीर गर्म होने के कारण इसे शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना जाता है। इसलिए शिवलिंग पर ठंडी वस्तुएं जैसे बेलपत्र, भांग, गंगाजल, चंदन, कच्चा दूध चढ़ाया जाता है।

केतकी का फूल : शिवपुराण की कथा के अनुसार केतकी फूल ने ब्रह्मा जी के झूठ में साथ दिया था, जिससे रुष्ट होकर भोलनाथ ने केतकी के फूल को श्राप दिया और कहा कि शिवलिंग पर कभी केतकी के फूल को अर्पित नहीं किया जाएगा। इसी श्राप के बाद से शिव को केतकी के फूल अर्पित किया जाना अशुभ माना जाता है।

शंख से जल : शिवजी को कभी भी शंख से जल भी नहीं अर्पित करना चाहिए। पुराणों के अनुसार, दैत्य शंखचूड़ के अत्याचारों से देवता परेशान थे। भगवान शंकर ने उसका वध किया था, जिसके बाद उसका शरीर भस्म हो गया, उस भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई थी। शिवजी ने शंखचूड़ का वध किया इसलिए कभी भी शंख से शिवजी को जल अर्पित नहीं किया जाता है।

टूटा चावल : शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव पर अखंड और धुले हुए साफ़ चावल चढ़ाने से उपासक को लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध माना गया है इसलिए यह शिव जी को नहीं चढ़ता। शिवजी के ऊपर भक्तिभाव से एक वस्त्र चढ़ाकर उसके ऊपर चावल रखकर समर्पित करना और भी उत्तम माना गया है।

सिंदूर : सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना हेतु अपने मांग में सिंदूर लगाती हैं और भगवान को भी अर्पित करती हैं। लेकिन शिव तो विनाशक हैं। यही वजह है कि सिंदूर से भगवान शिव की सेवा करना अशुभ माना जाता है।

तिल : शिवलिंग की उपासना में तिल को अर्पित करना भी वर्जित माना गया है। ऐसे में भूलकर भी तिल को भगवान शिव की पूजा-आराधना में प्रयोग नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के शरीर से मैल के रूप में उत्पन्न हुई थी। इसी वजह से शिव पूजा में इसे प्रयोग करना वर्जित माना गया है।

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