यदि बार-बार हो रहे हैं असफल तो नवग्रह के मुताबिक पौधा लगाएं, होगा तुरंत लाभ

बरेली: ज्योतिष एवं प्रकृति एक दूसरे के पूरक हैं। पेड़-पौधे नवग्रह शांति के लिए अहम भूमिका निभाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहानुकूल वृक्ष या पौधरोपण वास्तुदोष को दूर कर मानव जीवन में सुख-समृद्धि की अनवरत वर्षा करते हैं।


आचार्य पंडित मुकेश मिश्र ने बताया कि सभी पौधे लगाने से पहले गड्ढे में गाय का दूध एवं शहद अवश्य डालना चाहिए। पेड़-पौधे लगाने से अनेक बाह्य-आन्तरिक पीड़ा व दोषों को दूर कर समृद्धि एवं स्थिरता की प्राप्ति की जा सकती है। यदि कोई विशेष ग्रह परेशान कर रहा है तो उस ग्रह के प्रिय पेड़ या पौधे का पूजन करने से ग्रह अच्छे परिणाम देना शुरू कर देता है। दिशा एवं नक्षत्र के अनुसार, ग्रह औषधियां लगाई जाएं तो किसी भी प्रकार का दोष प्रभावी नहीं हो पाता।

नवग्रहों के लिए विशेष पौधे

सूर्य की पीड़ा होने पर : आंकड़ा का पौधा लगाएं। इससे बौद्धिक प्रगति, स्मृति शक्ति विकास प्राप्त होगा।

चंद्र की पीड़ा होने पर : पलाश का पौधा लगाएं। इससे मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है।

मंगल की पीड़ा होने पर : खैर या शिशिर का पौधा लगाएं। इसके पूजन से रक्त विकार तथा चर्म रोग ठीक होते हैं और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।

बुध की पीड़ा होने पर : आंधी झाड़ा का पौधा लगाएं। इसके पत्तों के स्नान से वायव्य बाधा का शमन व मानसिक संतुलन बना रहता है।

गुरु की पीड़ा होने पर : पारस पीपल का पौधा लगाएं। इसके पूजन से ज्ञान वृद्घि तथा भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।

शुक्र की पीड़ा होने पर : गूलर का पौधा लगाएं। इसके पूजन से पूर्व जन्म के दोषों का नाश होता है।

शनि की पीड़ा होने पर : शमी का पौधा लगाएं। इसके पूजन से धन, बुद्घि, कार्य में प्रगति, मनोवांछित फल की प्राप्ति तथा बाधाएं दूर होती हैं।

राहु की पीड़ा होने पर : चंदन का पौधा लगाएं। इसके पूजन से राहु पीड़ा से मुक्ति तथा सर्प दंश भय समाप्त होता है।

केतु की पीड़ा होने पर : अश्वगंधा का पौधा लगाएं। इससे मानसिक विकलता दूर होती है।

पर्यावरण-संरक्षण में नवग्रहों का बड़ा योगदान है। नक्षत्र के आधार पर यदि पौधरोपण जिस स्थान पर होता है, वहाँ वास्तु दोष कभी हो ही नहीं सकता।

दिशा और उसके प्रतिनिधि ग्रह
दिशा-स्वामी
पूरब-सूर्य,शुक्र।
आग्नेय-चन्द्रमा।
दक्षिण-मंगल।
दक्षिण-पश्चिम-केतु।
पश्चिम-शनि।
पश्चिम-उत्तर(वायव्य)-राहु।
उत्तर-बृहस्पति।
उत्तर-पूर्व(ईशान)-बुध।

दिशा एवं नक्षत्र के अनुसार, ग्रह औषधियां लगाई जाएं तो किसी भी प्रकार का दोष प्रभावी नहीं हो पाता। मूलतः प्रत्येक ग्रह अपनी गोचर अवस्था के अनुसार अनेक वनौषधियों का प्रतिनिधित्व करता है, जिनकी ज्योतिष-शास्त्र में गणना की जाए तो लक्षाधिक हैं, किंतु यहाँ कुछ शुभ वनस्पतियों का उल्लेख ही प्रासंगिक है।

दिन और नक्षत्र के अनुसार लगाएं पौधे

1. गुरुवार को पुष्य नक्षत्र मिलने पर ईशान में अपामार्ग (चिचिड़ा) का पौधा लगाना शुभ है।
2. शुक्रवार को आर्द्रा नक्षत्र में पूरब दिशा में गूलर उत्तम है।
3. सोमवार को अश्विनी नक्षत्र में आग्नेय दिशा में पलाश का रोपण शुभ है।
4. मंगलवार को अश्विनी नक्षत्र में दक्षिण दिशा में खदिर (ख़ैर) या शिशिर का वृक्ष का लगाना वास्तु की शुद्धता है।
5. दक्षिण-पश्चिम के कोने में शुक्रवार को श्रवण नक्षत्र को नागकेशर, कुश या शतावर लगाने से बाह्य बाधा से मुक्ति मिलती है।
6. गुरुवार को अनुराधा नक्षत्र में उत्तर दिशा की ओर अश्वत्थ (पीपल) का पौधा आरोपित करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
7. पश्चिम दिशा में शनिवार को शमी का वृक्ष लगाने से सर्वविध समृद्धि की प्राप्ति होती है। ध्यान रहे की शनिवार को शतभिषा या स्वाति नक्षत्र हो तो अति फलदायक होता है।
8. घर के मध्य (ब्रह्म-स्थान) में ढाई हाथ उत्तर-पूरब से हटकर सोमवार को बिल्व वृक्ष लगाने से घर सर्वबाधा मुक्त हो जाता है। उत्तर एवं पूर्व के मध्य नीम का वृक्ष आरोग्य-सुख प्रदान करता है। नीम का वृक्ष बुधवार को हस्त नक्षत्र में लगाने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।

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